
चार साल बाद भारत पहुंचे व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा दौरा
राष्ट्रपति Putin की यात्रा के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और अंतरिक्ष सहयोग पर व्यापक चर्चा की उम्मीद; नई वैश्विक परिस्थितियों और रूस-यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि में दौरा महत्वपूर्ण
नई दिल्ली (न्यूज़ डेस्क): रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार वर्षों के अंतराल के बाद भारत पहुंचे। उनकी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित निजी रात्रिभोज से हुई। बदलते वैश्विक समीकरणों और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच हो रहे इस उच्चस्तरीय दौरे में भारत-रूस आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर मुख्य रूप से चर्चा होने की संभावना है।
Putin के आगमन के साथ नई दिल्ली में पूरी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया। राजधानी में ड्रोन निगरानी, विशेष कमांडो टीमें, स्नाइपर्स और बख्तरबंद काफिलों के साथ अभूतपूर्व सुरक्षा तैनात की गई। यह रुसी राष्ट्रपति की भारत में पहली यात्रा है, जो 2019 के बाद हो रही है।
गुरुवार शाम प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति Putin के बीच निजी रात्रिभोज आयोजित किया गया। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेता विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे ढांचे की समीक्षा करेंगे। चर्चाओं का फोकस रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार, औद्योगिक साझेदारी और नए उभरते क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर रहेगा। इसके साथ-साथ दोनों नेता यूरेशिया और इंडो-पैसिफिक के भू-राजनीतिक मुद्दों पर विचार साझा करेंगे।
औपचारिक कार्यक्रम और शिखर बैठक
राष्ट्रपति पुतिन के मुख्य कार्यक्रम शुक्रवार को निर्धारित हैं। सुबह वह राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे — जो लगभग सभी राष्ट्राध्यक्षों की भारत यात्रा का नियमित हिस्सा रहा है। इसके बाद राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित होगा।
राष्ट्रपति भवन से पुतिन सीधे हैदराबाद हाउस जाएंगे, जहां शिखर वार्ता के मुख्य सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक चर्चा होगी। दोनों नेता आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने, व्यापार गलियारों और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने तथा अंतरिक्ष, तकनीक, नवाचार और परिवहन क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर बात करेंगे।
मोदी और पुतिन के बीच वर्किंग लंच के बाद दोनों नेता भारत-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे। इस मंच का उद्देश्य निजी क्षेत्र के सहयोग को बढ़ाना, नए निवेश आकर्षित करना और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी को प्रोत्साहित करना है। शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में राजकीय भोज देंगी। पुतिन रात लगभग 9:30 बजे भारत से प्रस्थान करेंगे।
व्यापार और द्विपक्षीय समझौते फोकस में
रूस के सहयोगी अधिकारियों ने बताया है कि इस यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय दस्तावेजों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इनमें 2030 तक रूस-भारत आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास का कार्यक्रम भी शामिल है, जिसे भविष्य के व्यापार और औद्योगिक सहयोग के रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।
रूसी अधिकारियों के अनुसार, 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 63.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 12% अधिक है। वर्तमान व्यापार में ऊर्जा, उर्वरक और मशीनरी की बड़ी हिस्सेदारी है। उद्योग क्षेत्रों में तकनीक, स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष अनुसंधान, खनन और श्रम प्रवासन कार्यक्रमों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएँ बताई गई हैं।
अपनी यात्रा के दौरान पुतिन RT टीवी के भारत संचालन के लॉन्च कार्यक्रम में भी शामिल होंगे, जिसे रूस की मीडिया और सांस्कृतिक आउटरीच को दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने वर्ष 2024 में पाँच बार टेलीफोन पर बातचीत की है और अंतिम बार तियानजिन में एससीओ सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी। बदलते वैश्विक परिदृश्यों के बीच भारत-रूस संबंध रक्षा परंपरा के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, ऊर्जा परिवर्तन, शिक्षा और श्रम गतिशीलता जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर रहे हैं।
पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस साझेदारी के भविष्य के रोडमैप के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान और नए व्यापारिक समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों की आर्थिक और सामरिक सहभागिता की दिशा तय करेंगे।
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