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Indigo Flights में देरी और रद्दीकरण पर राजनीतिक और उद्योग दबाव बढ़ा, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

Indigo flights देरी और रद्दीकरण पर सांसदों की चिंता तेज, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने यात्रियों को हो रही असुविधा पर सवाल उठाए; पायलट संघ ने भी DGCA और एयरलाइन प्रबंधन पर जवाबदेही तय करने पर जोर दिया


नई दिल्ली (न्यूज़ डेस्क): देशभर में इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों (Indigo flights) में लगातार देरी और रद्दीकरण से यात्री परेशान हैं। परिचालन अव्यवस्था को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है। सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार और शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है, वहीं पायलट संघ ने DGCA और एयरलाइन प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार ने गुरुवार को इंडिगो की उड़ानों में चल रही अनियमितताओं को लेकर चिंता व्यक्त की। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि इंडिगो देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन है, लेकिन इसके संचालन में लगातार देरी, रद्दीकरण और गैर-सटीकता की शिकायतें सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के निजीकरण के बाद देश में राष्ट्रीय वाहक की कमी हो गई है, जिसके चलते यात्रियों को पूरी तरह निजी एयरलाइनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। उनके शब्दों में,
“चूंकि हमारे पास राष्ट्रीय एयरलाइन नहीं है, हमें निजी खिलाड़ियों पर भरोसा करना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि इंडिगो अपने ढांचे में सुधार करे और केंद्रीय मंत्रालय इस पर ध्यान दे।”
कुमार ने कहा कि यात्रियों के पास विकल्प सीमित हैं, इसलिए सरकार को त्वरित कार्यवाही करनी होगी।

देश भर के हवाईअड्डों पर देरी और रद्दीकरण के कारण हजारों यात्री फंसे रहे हैं, जिसके बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक और उद्योग दोनों हलकों में बहस को बढ़ा दिया है।

इस मामले पर शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। गुरुवार को X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि इंडिगो के संचालन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और इससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने विमानन क्षेत्र में “एकाधिकार” यानी डुओपॉली को इसकी वजह बताया।
चतुर्वेदी ने दावा किया,
“हवाई क्षेत्र में सीमित प्रतिस्पर्धा के चलते किराए बढ़ रहे हैं, ढांचा कमजोर हो रहा है और उड़ानें रद्द हो रही हैं। यह शर्मनाक है और मैं उम्मीद करती हूं कि विमानन मंत्री संसद में इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर बयान देंगे।”


उद्योग निकायों की प्रतिक्रिया

उड़ानों में उत्पन्न अव्यवस्था के बीच पायलट संघ एयरलाइन पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA इंडिया) ने भी गुरुवार को गंभीर चिंता जताई। संघ का कहना है कि DGCA को एयरलाइन शेड्यूल की मंजूरी देते समय थकान जोखिम प्रबंधन प्रणाली (FRMS) के तहत पायलट उपलब्धता की उचित जांच करनी चाहिए।

अपने बयान में संगठन ने कहा कि नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियमों के संदर्भ में पायलटों की कथित कमी की वजह से उड़ान रद्दीकरण हो रहा है, जिससे एयरलाइन प्रबंधन और DGCA की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ALPA इंडिया के अनुसार,
“प्रमुख सवाल यह है कि पायलटों की मौजूदा कमी खराब योजना का परिणाम है या किसी रणनीतिक निर्णय का हिस्सा। यह दोनों परिस्थितियों का मिश्रण भी हो सकता है।”
संघ ने कहा कि संसाधन प्रबंधन में कमी से स्थिति और बिगड़ रही है, और यह आशंका है कि कुछ बड़े खिलाड़ी FDTL नियमों में ढील के लिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हों।


इंडिगो के हालिया संचालन संबंधी संकट ने यात्रियों, राजनीतिक दलों और उद्योग संस्थाओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। संसद के आगामी सत्र में यह मुद्दा उठने की संभावना है। केंद्र सरकार और DGCA की प्रतिक्रिया तथा एयरलाइन द्वारा उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

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