
मोदीनगर में 58 वर्षीय बीएलओ शिक्षक की मौत; मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दबाव पर सवाल
ब्रेन हैमरेज से मृत्यु की पुष्टि; कॉलेज प्रिंसिपल ने “भारी दबाव” और थकान को बताया संभावित कारण, प्रशासन ने जांच शुरू की
मोदीनगर (न्यूज़ डेस्क): उत्तर प्रदेश के मोदीनगर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) के रूप में तैनात 58 वर्षीय जीवविज्ञान शिक्षक लाल मोहन सिंह की शुक्रवार रात अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। जिला प्रशासन के अनुसार उनकी मृत्यु ब्रेन हैमरेज से हुई, जबकि कॉलेज प्रबंधन ने दावा किया है कि वह अत्यधिक दबाव और काम के बोझ से गुजर रहे थे।
लाल मोहन सिंह मोदी साइंस एंड कॉमर्स इंटर कॉलेज में जीवविज्ञान शिक्षक के रूप में सेवारत थे और हाल ही में उन्हें साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर कार्य के लिए बीएलओ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मतदाता सूची संशोधन के लिए चल रहे घर-घर सत्यापन के दौरान वे लगातार फील्ड में सक्रिय थे और पिछले कुछ दिनों से स्वयं को अस्वस्थ महसूस कर रहे थे।
शुक्रवार रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और नेहरू नगर स्थित उनके घर पर ही उनका निधन हो गया। परिवार और सहकर्मियों के अनुसार, बीते कई दिनों से वे तनावग्रस्त थे और आराम का समय बहुत कम मिला।
कॉलेज के प्रिंसिपल सतीश चंद अग्रवाल ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि सिंह लंबे समय से थकावट और तनाव की शिकायत कर रहे थे। उनके अनुसार, “वे अस्वस्थ थे, लेकिन चुनावी सत्यापन कार्य के चलते भारी दबाव में काम कर रहे थे। प्रशासन की ओर से यह संदेश दिया गया था कि काम किसी भी स्थिति में पूरा किया जाना चाहिए। इसके कारण वे मानसिक और शारीरिक तनाव से जूझ रहे थे।”
दूसरी ओर, प्रशासन ने इस मामले में प्रारंभिक जानकारी साझा की है। मोदीनगर के सहायक पुलिस आयुक्त अमित सक्सेना ने कहा, “एसडीएम मोदीनगर ने हमें सूचित किया कि लाल मोहन सिंह की मौत ब्रेन हैमरेज से हुई है। घटना के बाद एसडीएम प्रशासनिक पहलुओं की जांच कर रहे हैं।”
उन्होंने साथ ही आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नवंबर की शुरुआत से पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अभियान चल रहा है। इस दौरान बीएलओ और एसआईआर ड्यूटी में लगे अधिकारियों को घर-घर जाकर सत्यापन, दस्तावेज़ों की जाँच और नए मतदाताओं की प्रविष्टि का काम सौंपा गया है।
इसके बीच कई जिलों में अधिक काम, दबाव और कार्यस्थल उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं। हाल के सप्ताहों में बीएलओ के तनाव, बीमार पड़ने और कुछ मामलों में आत्महत्या या असमय मृत्यु की खबरों ने गंभीर चिंता उत्पन्न की है। शिक्षकों के संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताई है और सुरक्षित कार्य वातावरण, समय सीमा में ढील और स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों की मांग की है।
लाल मोहन सिंह की मृत्यु की खबर फैलते ही शिक्षकों में शोक की लहर दौड़ गई। कॉलेज के सहकर्मियों ने उन्हें शांत स्वभाव और अपने कार्य के प्रति समर्पित व्यक्ति बताया। पड़ोसियों का कहना है कि वे हमेशा मदद के लिए तत्पर रहते थे और अपने छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे।
एक सहकर्मी शिक्षक ने कहा, “उन्होंने अपने करियर में हमेशा पूरी निष्ठा से काम किया। चुनाव ड्यूटी के कारण वे बहुत थक चुके थे। हम सभी इस घटना से आहत हैं।”
प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सा विवरण के आधार पर विस्तृत जांच करने की बात कही है। यदि कार्य संबंधी दबाव और जिम्मेदारी को मृत्यु का कारण पाया जाता है, तो आगे नीति बदलाव और जवाबदेही की मांग उठ सकती है।
शिक्षक संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि इस घटना के बाद सरकार बीएलओ से जुड़े कार्य नियोजन, समय प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर कदम उठाएगी।
मोदीनगर में बीएलओ के रूप में ड्यूटी निभा रहे शिक्षक की मौत ने चुनावी कार्य के दौरान अधिकारियों की कार्य परिस्थितियों और दबाव के विषय को फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है। जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई आने वाले दिनों में इस मुद्दे की दिशा निर्धारित करेगी।