
नई दिल्ली, 28 फरवरी (केएनएन) सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
संशोधित अनुमान जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में अनुमानित 7.4 प्रतिशत से अधिक है, जो पहले की डेटा श्रृंखला पर आधारित थे।
सांख्यिकी सचिव सौरभ गर्ग और मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा प्रस्तुत अद्यतन जीडीपी श्रृंखला में पिछले 2011-12 आधार वर्ष की जगह 2022-23 का नया आधार वर्ष शामिल किया गया है। संशोधन आर्थिक माप की प्रतिनिधित्वशीलता और ग्रैन्युलैरिटी में सुधार लाने के उद्देश्य से अतिरिक्त डेटासेट को भी एकीकृत करता है।
पिछले वर्षों के लिए विकास संशोधन
नई श्रृंखला के तहत, 2023-24 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को पुरानी श्रृंखला के अनुमान से घटाकर 7.2 प्रतिशत से 9.2 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके विपरीत, 2024-25 के लिए वृद्धि को 6.5 प्रतिशत के पहले अनुमान से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
सरकार ने नई श्रृंखला के तहत 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए जीडीपी डेटा भी जारी किया। तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि दूसरी तिमाही में यह 8.4 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत थी।
क्षेत्रीय प्रदर्शन
2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, द्वितीयक क्षेत्र में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 2024-25 में 7.3 प्रतिशत से अधिक है। विनिर्माण को प्राथमिक चालक होने का अनुमान है, जिसमें पिछले वर्ष के 8.3 प्रतिशत की तुलना में 2025-26 में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। निर्माण वृद्धि 6.9 प्रतिशत अनुमानित है, जो 2024-25 में 7.1 प्रतिशत से थोड़ी कम है।
प्राथमिक क्षेत्र में मंदी की आशंका है, 2025-26 में विकास दर पिछले वर्ष के 5 प्रतिशत के मुकाबले 2.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि विकास दर 4.3 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत कम होने का अनुमान है, जबकि खनन और उत्खनन वृद्धि घटकर 11.2 प्रतिशत से 5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2026 में तृतीयक क्षेत्र का 8.9 प्रतिशत विस्तार होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है। सेवाओं में वृद्धि को व्यापार, होटल, परिवहन और संचार (10.3 प्रतिशत), साथ ही वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवाओं (10 प्रतिशत) में दोहरे अंक के विस्तार से समर्थन मिलने की उम्मीद है।
नाममात्र जीडीपी और राजकोषीय निहितार्थ
नई श्रृंखला के अनुसार, 2025-26 में भारत की नाममात्र जीडीपी 345.47 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो पिछली श्रृंखला के आधार पर अनुमान से लगभग 3.3 प्रतिशत कम है। 2023-24 और 2024-25 के लिए अर्थव्यवस्था के आकार को भी 3.8 प्रतिशत नीचे संशोधित किया गया है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नाममात्र जीडीपी में गिरावट का राजकोषीय घाटा-से-जीडीपी और ऋण-से-जीडीपी अनुपात सहित प्रमुख राजकोषीय संकेतकों पर प्रभाव पड़ सकता है, जो संभावित रूप से सरकार की राजकोषीय समेकन योजनाओं के प्रक्षेपवक्र को बदल सकता है।
(केएनएन ब्यूरो)