मध्यस्थता भागीदारी के बाद पुरस्कार के बाद क्षेत्राधिकार संबंधी चुनौतियों की अनुमति नहीं: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 19 मार्च (केएनएन) सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी पक्ष बिना किसी आपत्ति के कार्यवाही में भाग लेने और प्रतिकूल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद मध्यस्थ न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र को चुनौती नहीं दे सकता है।
न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि इस तरह की विलंबित आपत्तियों को अनुमति देने से मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान के सिद्धांत कमजोर हो जाएंगे।
जबकि यह फैसला मध्यस्थता की दक्षता और अंतिमता को मजबूत करता है, यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर अनुपालन बोझ भी बढ़ाता है, जिसमें परिष्कृत कानूनी संसाधनों की कमी हो सकती है और विलंबित कार्रवाई के कारण अनजाने में महत्वपूर्ण अधिकारों को जब्त करने का जोखिम हो सकता है।
विलंबित आपत्तियों की कोई गुंजाइश नहीं
कोर्ट ने कहा, "कोई भी पक्ष अपनी आस्तीन में 'क्षेत्राधिकार संबंधी ऐस' नहीं रख स...









