
नई दिल्ली, 2 फरवरी (केएनएन) कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026-27 एक भविष्योन्मुखी, विकासोन्मुख रूपरेखा तैयार करता है जिसका उद्देश्य वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उसकी महत्वाकांक्षा का समर्थन करना है।
सीएआई के अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने कहा, “बजट, जिसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रूप में वर्णित किया गया है, प्रमुख रणनीतिक और सीमांत क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ाने पर जोर देता है। यह कुछ वर्षों के भीतर 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था और 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा (विकसित भारत) की ओर बढ़ने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करता है।”
टेक्सटाइल सेक्टर पर फोकस
सीएआई ने श्रम प्रधान कपड़ा क्षेत्र पर बजट के नए जोर पर भी प्रकाश डाला।
वस्त्रों के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम मांग को बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और कौशल विकास, व्यापार करने में आसानी में सुधार और बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से समग्र क्षेत्रीय विकास का समर्थन करना चाहता है।
उपायों में तटीय बुनियादी ढांचे का विकास, मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना, तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा देना और खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज कार्यक्रम जैसी पहल शामिल हैं।
एसोसिएशन ने कहा, इन कदमों का उद्देश्य वैश्विक बाजार पहुंच, ब्रांडिंग और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना है।
विनिर्माण के लिए सीमा शुल्क और कर राहत
कोटक ने कहा, “सीमा शुल्क अनुसूची में एक महत्वपूर्ण बदलाव, जिसका उद्देश्य विनिर्माण को सक्षम करने के लिए राहत प्रदान करना है, एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन को पहली अनुसूची (शून्य सीमा शुल्क) में स्थानांतरित करना है। इससे हमारे तैयार कपड़ा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और विश्व कपड़ा बाजारों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।”
उन्होंने कहा, “भारत में वस्तुओं के आयात की सुविधा के लिए किसी विदेशी पार्टी से अर्जित कमीशन को सेवाओं के निर्यात के रूप में माना जाएगा, और उस पर कोई जीएसटी नहीं लगाया जाएगा।”
(केएनएन ब्यूरो)