
Indigo की उड़ानों में अव्यवस्था पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, पायलट संघ और एयरलाइन के बयान के बाद विवाद तेज
फ्लाइट रद्दीकरण और देरी पर सांसद ने ‘डुओपॉली’ का मुद्दा उठाया; Indigo ने तकनीकी व संचालन संबंधी कारण बताए, पायलट संघ ने DGCA की भूमिका पर सवाल खड़े किए
नई दिल्ली (न्यूज़ डेस्क): Indigo एयरलाइंस में पिछले कुछ दिनों से चल रही बड़े पैमाने पर उड़ान देरी और रद्दीकरण की घटनाओं ने देशभर के यात्रियों को परेशान कर दिया है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एयरलाइन पर कड़ा प्रहार करते हुए विमानन क्षेत्र में मौजूद “डुओपॉली” को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही पायलट संघ और इंडिगो द्वारा जारी ताज़ा बयानों के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि इंडिगो की संचालन व्यवस्था चरमरा गई है और इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विमानन क्षेत्र में दो बड़ी कंपनियों का वर्चस्व किराए बढ़ाने, खराब ढांचा और बार-बार फ्लाइट रद्द होने जैसी समस्याओं को जन्म देता है।
उन्होंने पोस्ट में लिखा,
“Indigo एयरलाइंस की संचालन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है, जिससे यात्रियों में भारी असंतोष फैल गया है। मैंने पहले भी हवाई क्षेत्र में डुओपॉली और उसके असर को लेकर चिंता जताई है—महंगे किराए, कमजोर व्यवस्था और उड़ानों की रद्दीकरण इसमें शामिल हैं।”
सांसद ने आगे कहा कि यह स्थिति शर्मनाक है और उम्मीद जताई कि नागरिक उड्डयन मंत्री संसद में इस पर स्वतः संज्ञान लेकर बयान देंगे।
दूसरी ओर, Indigo ने एक आधिकारिक बयान जारी करके हालिया उड़ान व्यवधानों के लिए कई संचालन संबंधी कारणों को जिम्मेदार बताया है। एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि बीते कुछ दिनों में “तकनीकी समस्याओं, हवाई अड्डों की भीड़ और परिचालन आवश्यकताओं” के चलते उड़ानों में देरी और रद्दीकरण हुए हैं। प्रवक्ता के अनुसार, एयरलाइन प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानें या रिफंड देने की कोशिश कर रही है और संचालन जल्द सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय सामने आया है जब हैदराबाद स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई उड़ानें देर से चलने, डायवर्ट होने और रद्द होने के चलते यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। यात्रियों में शिकायतें बढ़ने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
इसी बीच, एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA इंडिया) ने भी उड़ानों में देरी और रद्दीकरण पर चिंता व्यक्त की। संघ ने कहा कि DGCA को उड़ान समय सीमा के नए नियमों के तहत पायलट उपलब्धता की पूरी जांच करनी चाहिए, क्योंकि इसे अनदेखा करने से यात्रियों की सुरक्षा और संचालन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
ALPA इंडिया के बयान के अनुसार, “हाल के दिनों में देशभर में हुई उड़ान रद्दीकरण को कथित रूप से नए FDTL नियमों के कारण पायलटों की कमी से जोड़कर देखा जा रहा है। यह स्थिति एयरलाइनों की प्रबंधन रणनीति, DGCA की निगरानी और बाजार की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।” संघ ने आगे कहा कि यह पायलटों की कमी योजना की नाकामी भी हो सकती है और रणनीतिक कदम भी। उनके अनुसार, प्रमुख एयरलाइनों की संसाधन योजना में कमी साफ दिखाई देती है, और यह भी संभावना है कि नियमों में ढील के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से संकट को उभारा गया हो।
भारतीय विमानन क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में बड़े खिलाड़ी कम हो गए हैं। कई एयरलाइनों के बंद होने के बाद इंडिगो का हिस्सा लगातार बढ़ा है, जिसके चलते उसे बाजार में काफी वर्चस्व प्राप्त है। उद्योग विशेषज्ञ पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि प्रतिस्पर्धा कम होने पर यात्रियों के हित प्रभावित हो सकते हैं — चाहे वह किराया हो, उड़ान आवृत्ति हो या सेवा की गुणवत्ता।
फ्लाइट रद्दीकरण और देरी का मुद्दा संसद में उठ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे व्यवस्थित योजना और नियामकीय निगरानी से जुड़ा हुआ मान रहा है। उधर Indigo के परिचालन सामान्य करने के प्रयास जारी हैं, जबकि पायलट संघ ने DGCA से औपचारिक जांच की मांग की है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह संकट अस्थायी तकनीकी समस्या था या उद्योग के भीतर किसी बड़े ढांचे के मुद्दे का संकेत।