
Jihad Controversy: लोकसभा में “जिहाद” शब्द पर विवाद बढ़ा, चन्द्रशेखर आज़ाद ने कहा — इसका अर्थ ‘अन्याय के खिलाफ संघर्ष’
सपा सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलचल; आज़ाद समाज पार्टी प्रमुख बोले — संवैधानिक तरीकों से भी लड़ाई लड़ी जा सकती है, Jihad शब्द का गलत अर्थ न निकाला जाए
नई दिल्ली (न्यूज़ डेस्क): लोकसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी द्वारा “जिहाद” शब्द के उल्लेख के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। आज़ाद समाज पार्टी (एएसपी) के संस्थापक और सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद ने शब्द के संदर्भ का बचाव करते हुए कहा कि “जिहाद” का अर्थ संघर्ष और उत्पीड़न के खिलाफ जद्दोजहद है, न कि हिंसा। उन्होंने नदवी की टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई।
नदवी की टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए चन्द्रशेखर आज़ाद ने गुरुवार को पीटीआई वीडियो से कहा कि “जिहाद” एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ हिंदी में “जद्दोजहद” यानी संघर्ष है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को यदि अधिकारों से वंचित किया जाए या उत्पीड़न किया जाए, तो वह अन्याय के खिलाफ खड़ा होगा।
आजाद ने कहा, “हमारे देश ने भी स्वतंत्रता लम्बे संघर्ष के बाद हासिल की। हजारों लोगों ने अपना जीवन बलिदान किया—वह भी एक संघर्ष था। इसलिए उत्पीड़न का सामना करने वाला व्यक्ति विरोध करेगा, यह स्वाभाविक है।”
उन्होंने आगे कहा कि नदवी ने संसद में जिस संदर्भ में “जिहाद” शब्द का उपयोग किया, उसका संबंध अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से था।
आज़ाद के अनुसार, “वह केवल अपने समुदाय को अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश दे रहे थे और इस देश में लड़ाई संवैधानिक तरीकों से भी लड़ी जा सकती है।”
अन्य नेताओं की टिप्पणियाँ और संदर्भ
आजाद से जब भोपाल में आयोजित रैली के दौरान एक समान टिप्पणी के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख महमूद मदनी पर की गई आलोचनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मदनी परिवार के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास का उल्लेख किया।
आजाद ने कहा, “मदनी परिवार पर की जा रही राजनीतिक टिप्पणियों से मैं सहमत नहीं हूँ। उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। यदि वह गलत होते तो मैं बोलता, लेकिन किसी सही व्यक्ति की आलोचना नहीं कर सकता।”
नदवी ने संसद में क्या कहा
बुधवार को लोकसभा में बोलते हुए रामपुर से सपा सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने वक्फ संशोधन विधेयक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उम्मीद पोर्टल पर संपत्ति पंजीकरण के लिए छह माह की समयसीमा तय की गई है, लेकिन सर्वर समस्याओं के कारण पंजीकरण प्रक्रिया प्रभावित है और लगभग 70% संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हो पाया है।
नदवी ने कहा कि इससे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और अनुच्छेद 25 एवं 26 के अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि कई लोग इसे स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष से जोड़ रहे हैं और अगर अन्याय बढ़ता है तो “जिहाद” यानी संघर्ष करना पड़ सकता है।
उनकी इस टिप्पणी पर सत्तारूढ़ भाजपा सांसदों ने तीखी आपत्ति जताई और बयान को उकसाने वाला बताया।
नदवी का स्पष्टीकरण और मीडिया विवाद
विवाद बढ़ने के एक दिन बाद नदवी ने अपने बयान का बचाव किया और मीडिया कवरेज पर नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने संसद के बाहर कहा, “मैंने संसद में संदर्भ स्पष्ट रूप से रखा था। मीडिया मुस्लिम समुदाय का मज़ाक उड़ा रही है—यह संविधान, नैतिकता और देशभक्ति के खिलाफ है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया द्वारा समुदाय को निराश करने का प्रयास करना भी “अन्याय” है, और ऐसे मीडिया का बहिष्कार करना भी “जिहाद” यानी संघर्ष का एक तरीका है।
नदवी ने स्पष्ट कहा, “मैं मीडिया का बहिष्कार कर रहा हूँ।”
संसद में दिए गए बयान के बाद “जिहाद” शब्द की व्याख्या और राजनीतिक प्रतिक्रिया का विवाद ठंडा पड़ने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष के सांसदों की तरफ से मौखिक प्रतिक्रियाएँ जारी हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा में इस विषय पर फिर से चर्चा होने की संभावना है, जबकि सपा और एएसपी इसे अभिव्यक्ति और धार्मिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रही हैं।