
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। | फोटो क्रेडिट: कांग्रेस
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना पर सभी राजनीतिक दलों से संवाद की मांग की है। उन्होंने तेलंगाना मॉडल को अपनाने और आरक्षण की 50% सीमा हटाने के लिए संविधान संशोधन की सिफारिश की।
नई दिल्ली | 6 मई 2025 — कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से तत्काल संवाद शुरू करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने सरकार से तेलंगाना मॉडल पर आधारित जाति सर्वेक्षण को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का आग्रह भी किया है।
खरगे का यह पत्र 5 मई को लिखा गया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया। उन्होंने इसमें पिछली जाति जनगणना के आंकड़ों को पूरी तरह सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि हर जाति के सामाजिक-आर्थिक आंकड़े सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होने चाहिए ताकि सामाजिक न्याय और अवसर की समानता सुनिश्चित हो सके।
2 मई को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने कल रात प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जाति जनगणना पर श्री मोदी के अचानक और हताशापूर्ण यू-टर्न के बारे में बताया – जबकि पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमलों पर देश की पीड़ा और गुस्सा लगातार जारी है। खड़गे जी ने तीन बहुत ही खास सुझाव दिए हैं।
Following the CWC meeting on May 2nd, the Congress President Shri Mallikarjun @kharge ji wrote to the PM last night on Mr. Modi’s sudden and desperate U-turn on the caste census – even as the nation’s anguish and anger at the brutal Pahalgam terror attacks continued unabated.… pic.twitter.com/1wIgUXFqk6
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 6, 2025
50% आरक्षण सीमा हटाने की दोहराई मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में आरक्षण पर लागू 50% सीमा को “मनमानी” करार देते हुए उसे हटाने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह सीमा वास्तविक सामाजिक संरचना को प्रतिबिंबित नहीं करती और इसे खत्म किया जाना चाहिए।
उन्होंने तमिलनाडु के आरक्षण कानून का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि अन्य राज्यों के समान कानूनों को भी संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक सुरक्षा दी जानी चाहिए।
निजी संस्थानों में आरक्षण को लेकर नई कानून की सिफारिश
खरगे ने यह भी उल्लेख किया कि 25 मार्च 2025 को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति की 364वीं रिपोर्ट में अनुच्छेद 15(5) के तहत निजी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण को लागू करने के लिए एक नए कानून की सिफारिश की गई थी। उन्होंने इस सिफारिश को जल्द से जल्द लागू करने की आवश्यकता जताई।
तेलंगाना मॉडल को बताया उपयोगी
जाति जनगणना की प्रक्रिया पर बात करते हुए खरगे ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह तेलंगाना मॉडल से सीख ले, विशेष रूप से प्रश्नावली के डिजाइन और आंकड़ों के संग्रह की पद्धति के संदर्भ में। उनका मानना है कि बेहतर डिज़ाइन की गई प्रश्नावली अधिक विश्वसनीय और उपयोगी आंकड़े प्रदान कर सकती है।
जाति जनगणना को विभाजनकारी नहीं मानना चाहिए: खरगे
पत्र में खरगे ने यह स्पष्ट किया कि जाति जनगणना को किसी भी स्थिति में विभाजनकारी नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा प्रयास है जो समाज के वंचित, पिछड़े और उत्पीड़ित वर्गों को उनके अधिकार दिलाने में सहायक होगा और संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित सामाजिक-आर्थिक न्याय की भावना को साकार करेगा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया और प्रधानमंत्री पर जाति जनगणना पर “अचानक और बेताब यू-टर्न” लेने का आरोप लगाया।