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मुख्यधारा की पार्टियों से सिर्फ मुसलमानों के लिए लड़ने की उम्मीद गलत: महमूद मदनी

मुख्यधारा की पार्टियों से सिर्फ मुसलमानों के लिए लड़ने की उम्मीद गलत: महमूद मदनी

‘कांग्रेस अपने मुद्दे नहीं उठा पा रही, दूसरों के लिए क्या लड़ेगी’, जिहाद बयान पर विवाद के बीच स्पष्टीकरण

नई दिल्ली, 3 दिसंबर 2025 — न्यूज़ डेस्क 

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने बुधवार को कहा कि किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी से केवल मुसलमानों के लिए लड़ने या सिर्फ उनके मुद्दे उठाने की उम्मीद करना गलत है। जिहाद संबंधी उनके हालिया बयान से पैदा हुए राजनीतिक विवाद के बीच मदनी ने कहा कि वह किसी भी पार्टी से ऐसी उम्मीद नहीं रखते।

मदनी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि यह पार्टी फिलहाल अपने ही मुद्दे नहीं उठा पा रही है, ऐसे में वह दूसरों के लिए क्या लड़ पाएगी।

“किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी से केवल मुसलमानों के मुद्दों के लिए लड़ने की उम्मीद करना गलत है। मैं किसी भी पार्टी से ऐसी उम्मीद नहीं रखता। आज स्थिति यह है कि कांग्रेस अपने मुद्दे भी नहीं उठा पा रही — तो दूसरों के लिए क्या लड़ेगी?” — महमूद मदनी

उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब ‘जिहाद’ पर दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। उनके बयान पर न केवल भाजपा ने आपत्ति जताई, बल्कि समुदाय के कई नेताओं ने भी अलग राय व्यक्त की।

विवाद बढ़ने के बाद मदनी ने अपने बयान का स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि “जिहाद एक पवित्र शब्द है” और इसे नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना गलत है।

“केंद्र सरकार और राज्यों ने तय कर लिया है कि मुसलमानों से जुड़ी कोई भी नकारात्मक बात सामने आएगी तो उसे जिहाद कहा जाएगा। जिहाद एक पवित्र शब्द है। हम जिहाद के वास्तविक अर्थ के लिए लड़ रहे हैं। इस शब्द का इस्तेमाल इस्लाम को बदनाम करने के लिए योजना के तहत किया जा रहा है।” — महमूद मदनी

मदनी ने स्वीकार किया कि उनके बयान की वजह से भ्रम पैदा हुआ और कहा कि यदि संदर्भ में समझा जाए तो इसमें कोई समस्या नहीं है।

“यह सही है कि कुछ भ्रम पैदा हुआ है, लेकिन यदि पूरे संदर्भ में सुना जाए तो गलतफहमी नहीं होगी। गलतफहमी न हो यह मेरी जिम्मेदारी थी, और मैं उसे पूरी तरह निभा नहीं पाया। इसके लिए आप मुझे जिम्मेदार ठहरा सकते हैं।” — महमूद मदनी

उन्होंने आगे कहा कि जिहाद का अर्थ सिर्फ संघर्ष या हिंसा नहीं, बल्कि स्वयं को सुधारने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का नाम है।

“भारत में जिहाद के कई अर्थ हैं। सबसे बड़ा जिहाद है अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखना और स्वयं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करना। यदि कहीं अन्याय हो, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना भी जिहाद है।” — महमूद मदनी

पृष्ठभूमि

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान ‘जिहाद’ के अर्थ पर मदनी के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया था। भाजपा नेताओं ने इसे भड़काऊ बताते हुए निशाना साधा, जबकि समुदाय के कुछ नेताओं ने भी उनकी राय से असहमति जताई। सोशल मीडिया पर इस बयान पर तीखी बहस चल रही है।

इस राजनीतिक तनाव के बीच मदनी ने कहा कि उनका उद्देश्य नफरत फैलाना नहीं, बल्कि गलतफहमियों को दूर करना है।

आगे क्या?

अब देखना होगा कि मदनी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बाद विवाद शांत होता है या राजनीतिक बहस आगे बढ़ती है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस मुद्दे को राजनीतिक मंचों पर उठा रहे हैं।


 

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