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ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय ड्रोन (Drone) उद्योग को ₹4,000 करोड़ का आर्डर

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से भारतीय ड्रोन  (Drone) उद्योग को नई उड़ान, ₹4,000 करोड़ के रक्षा आदेश संभावित, 2030 तक $13B उद्योग बनने की उम्मीद।

नई दिल्ली, 22 मई (केएनएन) — ऑपरेशन सिंदूर की सफल क्रियान्वयन ने भारत के स्वदेशी ड्रोन (Drone) उद्योग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

भारतीय सशस्त्र बलों एवं रक्षा मंत्रालय द्वारा ड्रोन तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण, स्वदेशी ड्रोन (Drone) विनिर्माताओं को शीघ्र ही ₹4,000 करोड़ तक के आर्डर प्राप्त होने की संभावना है।

ऑपरेशन सिंदूर ने ड्रोन की रणनीतिक महत्ता एवं प्रभावशीलता को उजागर किया, जिससे सैन्य एवं रक्षा विभागों ने स्थानीय कंपनियों से क्रय हेतु सक्रियता से संवाद आरंभ किया है।

26 मई को निर्धारित प्रदर्शनी में 70 से अधिक कंपनियाँ भाग लेंगी, जहाँ वे रक्षा अधिकारियों के समक्ष विविध ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी।

वर्तमान में भारत का ड्रोन (Drone) क्षेत्र 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का है, तथा अनुमान है कि यह 2030 तक 13 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगा।

सरकार की पहल एवं बढ़ती मांग से प्रेरित होकर, देश में ड्रोन निर्माण तेज़ी से विस्तारित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र अत्यधिक प्रगति करेगा।

इस संदर्भ में, एक प्रमुख ड्रोन (Drone) निर्माता कंपनी के निदेशक दीपक भारद्वाज ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के पश्चात रक्षा क्षेत्र ने स्थानीय ड्रोन तकनीकों में विशेष रुचि दिखाई है। हमारी कंपनी ने भी इस मांग को पूरा करने हेतु उत्पादन क्षमता में वृद्धि की है।”

उद्योग की वरिष्ठ अधिकारी सिमरन शाह के अनुसार, “12 से 24 कंपनियाँ सशस्त्र बलों से महत्त्वपूर्ण आर्डर प्राप्त कर सकती हैं। यह पहल भारतीय ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाएगी एवं तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन देगी।”

ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस विकास को सकारात्मक रूप से रेखांकित करते हुए कहा, “यह भारतीय ड्रोन क्षेत्र के लिए एक निर्णायक क्षण है। सशस्त्र बलों द्वारा प्रदर्शित विश्वास हमारे स्वदेशी उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।”

रक्षा क्षेत्र से इतर, कृषि, खनन एवं लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी ड्रोन तकनीक की मांग निरंतर बढ़ रही है। सरकार की पीएलआई (उत्पादन आधारित प्रोत्साहन) योजना एवं उदार नीतियों के चलते 400 से अधिक कंपनियाँ इस विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन चुकी हैं।

भारत की यह ड्रोन क्रांति न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ कर रही है, अपितु देश को वैश्विक ड्रोन बाज़ार में एक प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में भी अग्रसर है।— (केएनएन ब्यूरो)


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