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म्यांमार: चिन राज्य में महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के करीब पहुंचे विद्रोही
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म्यांमार: चिन राज्य में महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के करीब पहुंचे विद्रोही

जनवरी 2025 में, चिन राज्य के फलाम टाउनशिप में मोर्चे की ओर जाते प्रतिरोध बलों के सदस्य एक पिकअप ट्रक पर सवार। [वेलेरिया मोंगेली/अल जज़ीरा] म्यांमार वायु सेना के भारी हमलों के बीच, 'मिशन जेरूसलम' की सफलता के लिए चिन विद्रोहियों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। फलाम टाउनशिप, चिन राज्य: पश्चिमी म्यांमार के पहाड़ों में, एक विद्रोही मुख्यालय की दीवार पर शहीद लड़ाकों की तस्वीरें लगी हैं – करीब 80 युवाओं की यह सूची मई 2021 में मारे गए 28 वर्षीय सलाई कुंग नाव पियांग से शुरू होती है। चिन नेशनल डिफेंस फोर्स (CNDF) का नुकसान इस हॉल से कहीं बड़ा है और चिन राज्य – भारत की सीमा से लगे इस ईसाई बहुल इलाके, जहां चिन समुदाय के लड़ाकों ने सेना को अधिकांश क्षेत्र से खदेड़ दिया है – में जारी संघर्ष के साथ बढ़ रहा है। CNDF के उपाध्यक्ष पीटर थांग ने अल जज़ीरा को दिए हालिया इंटरव्यू में कहा, "भले ही वे आत्मसम...
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म्यांमार: रोहिंग्या मुसलमानों पर ज़ुल्म की इन्तहा, सेना अबोध बच्चों को मार रही है गोली

पड़ोसी देश म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या बढती ही जा रही है।वर्षों से जारी रोहिंग्या मुस्लिम विरोधी जातीय हिंसा विकराल रूप धारण करती जा रही है।गौर तलब है कि, गत 25 अगस्त से चल रही मुस्लिम विरोधी हिंसा ने अब भयानक रूप ले लिया है। रोहिंग्या मुस्लिम और सेना के बीच चल रहे संघर्ष में अब तक 200 से ज्यादा लोग अपनी जानें गवां  चुके हैं और अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन “ह्यूमन राइट्स वॉच” के अनुसार  गत डेढ़ सप्ताह के भीतर राखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुस्लिमों के तकरीबन 1,200 घरों को ढाह दिया गया और 700 घरों को आग लगा दी गई।ख़बरें आ रही हैं कि, म्यांमार की सेना द्वारा बच्चों को गोलियों का निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल म्यांमार में लगभग 10 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं, जिन्हें वहां की सरकार अपना नागरिक नहीं मानती है।रख़ाइन प्रांत में वर्ष 2012 से सांप्रदायिक हिंसा चलने के कारण...