
नई दिल्ली, 4 दिसंबर (केएनएन) आधार, यूपीआई और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) जैसी पहलों को ‘सूक्ष्म’ सुधार बताते हुए ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट इंस्टीट्यूट ने कहा है कि ये डिजिटल ड्राइव अधिक घरों और व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत कर रहे हैं और लेनदेन लागत को कम कर रहे हैं।
“2026 ग्लोबल आउटलुक” शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में, ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट इंस्टीट्यूट ने कहा कि बढ़ती घरेलू बचत और डिजिटल बुनियादी ढांचे के पूंजी निर्माण के विस्तार के कारण भारत की वित्तीय प्रणाली विकास का एक प्रमुख इंजन बन रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “ये बदलाव भारत को अपने पूंजीगत खर्च का एक बड़ा हिस्सा घरेलू बचत से वित्त पोषित करने, चालू खाते की स्थिरता का समर्थन करने और बाहरी ऋण को सकल घरेलू उत्पाद के 20% के करीब रखने में मदद कर सकते हैं। वे पूंजी बाजार में घरेलू भागीदारी को भी बढ़ा रहे हैं और दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए अधिक स्थिर आधार बना रहे हैं।”
रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया और कहा गया कि कुल मिलाकर सरकार की नीति सहायक बनी हुई है।
इसने हाल ही में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में बदलाव, कॉर्पोरेट कर को तर्कसंगत बनाने और सुव्यवस्थित राज्य-स्तरीय अनुमोदनों का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि विनियमन सरल हो रहा है।
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है, “राजकोषीय नीति अनुशासन को निवेश के साथ जोड़ रही है, जबकि नियामकों ने म्यूचुअल फंड मूल्य निर्धारण और कम निवेशक लागत में अधिक पारदर्शिता पर जोर दिया है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रित रिटर्न ड्राइवरों की दुनिया में, भारत विशिष्ट अंतर्निहित ड्राइवरों वाले कुछ बड़े बाजारों में से एक है, जिसमें लचीली घरेलू मांग, सुधार और युवा कार्यबल शामिल हैं।
इसमें आगे कहा गया है कि भारत का विकास मिश्रण अधिक पूंजी-सघन और प्रौद्योगिकी-सक्षम निवेश की ओर वैश्विक कदम के अनुरूप बदल रहा है।
ब्लैकरॉक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दशक के दौरान भारत की सालाना 6-7 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे यह वैश्विक विकास में एक टिकाऊ योगदानकर्ता बना रहेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल से बाहरी दबाव, मजबूत डॉलर या वैश्विक जोखिम निकट भविष्य में निगरानी बिंदु बने रहेंगे।
(केएनएन ब्यूरो)