
Nitish Kumar ने गांधी मैदान में दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। एनडीए ने 202 सीटें जीतीं और 19 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।
पटना: पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार सुबह नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पिछले सप्ताह हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया।
इस चुनाव में जदयू ने 243 में से 85 सीटें जीतीं। भाजपा के साथ मिलकर एनडीए गठबंधन ने कुल 202 सीटों पर जीत हासिल की। इस बड़े जनादेश के साथ नीतीश कुमार ने फिर से सरकार बनाने की जिम्मेदारी संभाली।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और एनडीए के अन्य नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बधाई संदेश दिया और नई टीम को बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की शुभकामनाएं दीं।
नीतीश कुमार अब देश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हो गए हैं। अगर वह यह कार्यकाल पूरा कर लेते हैं, तो वह सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग का रिकॉर्ड भी पार कर लेंगे।
शपथ समारोह में कुल 19 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इनमें भाजपा के सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और दिलीप जायसवाल जैसे अनुभवी नेता शामिल थे। चौधरी और सिन्हा पहले भी उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।
भाजपा के संजय कुमार सिंह, प्रमोद कुमार और लखेंद्र रौशन ने भी शपथ ली। प्रमोद कुमार पहले कानून, गन्ना उद्योग और कला-संस्कृति मंत्री रह चुके हैं। भाजपा ने रामा निषाद, नारायण प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, अरुण शंकर प्रसाद और संजय ‘टाइगर’ सिंह को भी मौका दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता और जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह को भी मंत्री बनाया गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता राम कृपाल यादव तथा पूर्व सड़क निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने भी शपथ ली।
इस बार भाजपा के 14 चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं, जबकि जदयू के छह नेता मंत्री बने हैं। जदयू की ओर से बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे वरिष्ठ मंत्री फिर शामिल हुए हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग संभाल चुके मोहम्मद जामा खान को भी दोबारा मंत्री बनाया गया है। लeshi सिंह, मदन सनी और सुनील कुमार को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
छोटे सहयोगी दलों — लोक जनशक्ति पार्टी, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मंच — को भी एक-एक मंत्री पद दिया गया। इनमें दीपक प्रकाश और संतोष मांझी जैसे नेताओं के बेटे शामिल हैं। दीपक प्रकाश पहली बार मंत्री बने हैं, जबकि संतोष मांझी पहले आईटी और आपदा प्रबंधन मंत्री रहे हैं।