Saturday, March 7 Welcome

Sanchar Saathi ऐप पर विवाद: सिंधिया बोले— ऐप वैकल्पिक, चाहें तो हटा दें

संचार साथी ऐप पर विवाद के बीच केंद्र का स्पष्टीकरण: उपयोगकर्ता चाहें तो ऐप हटा सकते हैं

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले— ऐप वैकल्पिक, सरकार का उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी रोकना

नई दिल्ली, 2 दिसंबर 2025 — न्यूज़ डेस्क 

संचार साथी ऐप को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यह ऐप अनिवार्य नहीं है और उपयोगकर्ता इसे अपने फोन से हटाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए इस ऐप की जानकारी देना है।

सिंधिया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यदि आप संचार साथी ऐप नहीं रखना चाहते, तो आप इसे डिलीट कर सकते हैं। यह पूरी तरह वैकल्पिक है… हमारा काम है कि हम इस ऐप को हर किसी तक पहुंचाएं। इसे फोन में रखना या हटाना पूरी तरह उपयोगकर्ता की इच्छा है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐप को फोन में पहले से इंस्टॉल किए जाने का निर्णय केवल लोगों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए लिया गया है, न कि निगरानी के लिए।

यह बयान उस समय आया है जब दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर से प्रभावी नए निर्देश जारी किए हैं, जिनमें सभी मोबाइल फोन निर्माताओं और आयातकों को भारत में बेचे जाने वाले नए स्मार्टफोन्स में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करने के लिए कहा गया है। कंपनियों को इस आदेश को लागू करने के लिए 90 दिन और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 120 दिन का समय दिया गया है।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा कि विपक्ष बिना मुद्दे के विवाद पैदा कर रहा है।

“जब विपक्ष के पास मुद्दे नहीं होते तो वे मुद्दे तलाशते हैं। हमारा उद्देश्य उपभोक्ताओं की मदद करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह ऐप न तो निगरानी करता है और न ही कॉल सुनता है। उपयोगकर्ता इसे अपनी इच्छा से सक्रिय या निष्क्रिय कर सकते हैं।” — ज्योतिरादित्य सिंधिया

सिंधिया ने बताया कि संचार साथी साइबर अपराध और फर्जी मोबाइल कनेक्शनों पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक करीब 1.75 करोड़ फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए हैं और लगभग 20 लाख चोरी किए गए मोबाइल फोन का पता लगाया गया है, जिनमें से 7.5 लाख फोन उपभोक्ताओं को वापस सौंपे जा चुके हैं।

DoT के अनुसार, यह कदम उपभोक्ताओं को नकली उपकरणों से बचाने, टेलीकॉम दुरुपयोग की शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाने और संचार साथी पहल को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। ऐप IMEI आधारित पहचान प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं को फोन की सत्यता जांचने, चोरी या खोए फोन का पता लगाने, अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की निगरानी करने और वित्तीय संस्थानों को डिवाइस सत्यापन में मदद करता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से ऐप की मदद से 7 लाख से अधिक चोरी और खोए फोन को बरामद किया गया है, जिनमें से केवल अक्टूबर में 50,000 फोन वापस मिले।

एप्पल, सैमसंग, गूगल, वीवो, ओप्पो और शाओमी सहित प्रमुख कंपनियां भारत में फोन बनाती हैं, और यह आदेश उन सभी पर लागू होगा।

पृष्ठभूमि

कांग्रेस ने संचार साथी ऐप के अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन का विरोध किया है और उसे नागरिकों की निजता पर हमला बताया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम को एक “स्नूपिंग ऐप” करार दिया और कहा कि सरकार नागरिक स्वतंत्रता को कमजोर कर रही है।

वहीं कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भारत “सर्विलांस स्टेट” बन गया है।

“क्या यह आधिकारिक पेगासस है या उत्तर कोरिया के रेडफ्लैग जैसा ऐप? क्या भारत अब पुलिस स्टेट बन चुका है? निजता का अधिकार अब खत्म हो गया है।” — रणदीप सुरजेवाला

कांग्रेस सांसद रेनूका चौधरी ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव दिया।

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और सरकार का यह निर्णय असंवैधानिक है।

“एक ऐसा सरकारी ऐप जिसे हटाया भी न जा सके, हर नागरिक की निगरानी का साधन बन जाएगा। यह हर गतिविधि और निर्णय पर नियंत्रण का तरीका है।” — के.सी. वेणुगोपाल

आगे क्या?

अब यह देखना होगा कि मोबाइल कंपनियां आदेश को कैसे लागू करती हैं और क्या विपक्ष इस मुद्दे को संसद में आगे बढ़ाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह नागरिकों की सुरक्षा के लिए है, जबकि विपक्ष इसे निजता पर हमला बता रहा है। विवाद के बीच उपयोगकर्ताओं को फिलहाल ऐप हटाने की स्वतंत्रता दी गई है।


 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *