नई दिल्ली, 4 फरवरी (केएनएन) वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में साझा की गई जानकारी के अनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने विशेष रूप से कृषि और सूक्ष्म उद्यमों में अपने निर्धारित प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्य को पार कर लिया है।
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के लिए आरबीआई मानदंड
मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 24 मार्च, 2025 को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) पर अद्यतन मास्टर दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें आरआरबी के लिए विशिष्ट लक्ष्य और उप-लक्ष्य निर्धारित किए गए।
संशोधित मानदंडों के तहत, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को अपने समायोजित नेट बैंक क्रेडिट (एएनबीसी) का 75 प्रतिशत या ऑफ-बैलेंस शीट एक्सपोजर (सीईओबीएसई) के बराबर क्रेडिट प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आवंटित करना होगा।
इसमें कृषि के लिए 18 प्रतिशत शामिल है, जिसमें से 14 प्रतिशत गैर-कॉर्पोरेट किसानों के लिए है, 10 प्रतिशत विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए, 7.5 प्रतिशत सूक्ष्म उद्यमों के लिए और 15 प्रतिशत कमजोर वर्गों के लिए है।
लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों की गणना पिछले वर्ष की संबंधित तिथि के अनुसार एएनबीसी या सीईओबीएसई के आधार पर की जाती है।
आरआरबी समग्र पीएसएल लक्ष्य से आगे निकल गए
2024-25 के लिए आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, आरआरबी ने समग्र प्राथमिकता क्षेत्र ऋण आवश्यकता को पार कर लिया है। आरआरबी द्वारा कुल पीएसएल 88.44 प्रतिशत रहा, जो अनिवार्य 75 प्रतिशत लक्ष्य से काफी ऊपर है।
कृषि और सूक्ष्म उद्यमों के लिए मजबूत ऋण प्रवाह
आरआरबी ने सेक्टर-विशिष्ट बेंचमार्क को भी पार कर लिया है। कृषि क्षेत्र को ऋण 30.36 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो निर्धारित उप-लक्ष्य से काफी अधिक है, जबकि सूक्ष्म उद्यमों को ऋण कुल उधार का 22.77 प्रतिशत था, जो 7.5 प्रतिशत की आवश्यकता से कहीं अधिक था।
मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े किसानों, छोटे व्यवसायों और ग्रामीण उद्यमों को संस्थागत ऋण का विस्तार करने, देश भर में समावेशी विकास और वित्तीय समावेशन का समर्थन करने में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की निरंतर भूमिका को दर्शाते हैं।
(केएनएन ब्यूरो)