कुमारस्वामी ने विकास को गति देने के लिए लचीले वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर प्रकाश डाला


नई दिल्ली, 25 फरवरी (केएनएन) केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बुधवार को भारत के बुनियादी ढांचे के विस्तार और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के समर्थन में एक लचीले वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला।

नई दिल्ली में छठे वार्षिक निर्माण उपकरण वित्त कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए, मंत्री ने निर्माण उपकरण क्षेत्र को मजबूत करने में संरचित पूंजी पहुंच की भूमिका को रेखांकित किया।

सरकार के बुनियादी ढांचे पर जोर देने का हवाला देते हुए, मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक निवेश को भौतिक बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता दोनों की ओर मोड़ा जा रहा है।

उन्होंने राजमार्गों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, बंदरगाहों, नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे को कवर करने वाली संरचनात्मक, बहु-वर्षीय प्रतिबद्धता के रूप में पूंजीगत व्यय के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय बजट आवंटन की ओर इशारा किया।

कुमारस्वामी ने भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित निर्माण एवं बुनियादी ढांचा उपकरण संवर्धन योजना (सीआईई) का भी जिक्र किया। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के उद्देश्य से उच्च मूल्य और तकनीकी रूप से उन्नत निर्माण उपकरणों के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना है।

इवेंट में उद्धृत उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारतीय निर्माण उपकरण बाजार का मूल्य वर्तमान में लगभग 9.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और 2030 तक दोगुना से अधिक हो सकता है। इस क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025 में 1,40,000 इकाइयों से अधिक की बिक्री दर्ज की।

मंत्री ने आगे कहा कि स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम बेड़े प्रबंधन, पूर्वानुमानित रखरखाव प्रणाली और इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड उपकरण सहित तकनीकी बदलाव इस क्षेत्र को नया आकार दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव जैसी सरकारी पहल स्वच्छ और अधिक टिकाऊ औद्योगिक प्रथाओं की ओर परिवर्तन का समर्थन कर रही है।

व्यापक आर्थिक प्रभाव पर जोर देते हुए, कुमारस्वामी ने कहा कि एक मजबूत वित्तपोषण ढांचे का मूल्य श्रृंखला में कई गुना प्रभाव होगा, जिससे निर्माताओं, ठेकेदारों, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और बुनियादी ढांचा डेवलपर्स को लाभ होगा।

उन्होंने हितधारकों से देश के दीर्घकालिक विकास उद्देश्यों के अनुरूप निर्माण उपकरण विनिर्माण और वित्तपोषण के लिए भारत को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहयोग करने का आग्रह करते हुए निष्कर्ष निकाला।

(केएनएन ब्यूरो)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *