नई दिल्ली, 31 दिसंबर (केएनएन) खान मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि भारत के खनन पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाने और देश की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 2025 में व्यापक नीतिगत सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की गई।

इन प्रयासों के केंद्र में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 का अधिनियमन था, साथ ही राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) के विस्तार और नाम को राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट (एनएमईडीटी) के रूप में नामित किया गया था, जो कि उन्नत फंडिंग प्रावधानों द्वारा समर्थित था।

मंत्रालय ने कहा कि सुधार एजेंडा स्पष्ट रूप से परिभाषित समयसीमा के साथ खनिज नीलामी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, कैप्टिव खानों से खनिजों की बिक्री पर प्रतिबंध हटाने और प्रमुख खनिजों के रूप में चुनिंदा खनिजों के पुनर्वर्गीकरण के माध्यम से नियामक दक्षता और निवेशकों के विश्वास में सुधार लाने पर भी केंद्रित है।

इसके अलावा, इस क्षेत्र में अधिक स्पष्टता और पूर्वानुमान लाने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के लिए रॉयल्टी दरों को अधिसूचित किया गया था।

आगे के उपायों में बाजार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खनिज विनिमय को बढ़ावा देना और नई संसाधन क्षमता को अनलॉक करने के लिए अपतटीय खनन सुधारों का कार्यान्वयन शामिल है।

सामूहिक रूप से, इन पहलों का उद्देश्य पारदर्शिता में सुधार करना, व्यापार करने में आसानी बढ़ाना, खनिज उत्पादन में तेजी लाना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

सुधारों ने खनन क्षेत्र को आर्थिक विकास का समर्थन करने में एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में स्थापित किया है।

(केएनएन ब्यूरो)



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