नई दिल्ली, 27 दिसंबर (केएनएन) भारत के डिजिटल गवर्नेंस इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम में, नीति आयोग और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) ने विकासशील भारत रणनीति कक्ष (वीबीएसआर) में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का उद्देश्य नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच अंतर को पाटकर डिजिटल रूप से सशक्त, भविष्य के लिए तैयार भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है।
संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना
यह साझेदारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) की कार्यान्वयन शाखा के रूप में नीति आयोग की नीति विशेषज्ञता और एनईजीडी की तकनीकी क्षमताओं को एक साथ लाती है।
अधिकारियों ने कहा कि सहयोग संस्थागत समन्वय को बढ़ाएगा, साइलो को कम करेगा और केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सभी क्षेत्रों में डिजिटल पहलों को तेजी से, अधिक कुशल तरीके से लागू करने में सक्षम बनाएगा।
मुख्य फोकस क्षेत्र
एमओयू के तहत, दोनों संस्थान कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। इनमें वास्तविक समय नीति निगरानी, भविष्य कहनेवाला विश्लेषण और डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए वीबीएसआर के भीतर कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को बढ़ाकर एआई-संचालित शासन को मजबूत करना शामिल है।
यह साझेदारी डिजिलॉकर, उमंग और एपीआई सेतु जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, अंतरसंचालनीयता और सेवा वितरण में सुधार के लिए नीति आयोग की ‘एनआईटीआई फॉर स्टेट्स’ पहल के साथ संरेखित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।
यह समझौता आईटी ढांचे, डिजिटल उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों के बीच डिजिटल साक्षरता और साक्ष्य-आधारित शासन को बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों सहित संस्थागत संसाधन साझाकरण प्रदान करता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि साझेदारी नीति और कार्यान्वयन के बीच समन्वय में सुधार करते हुए नई डिजिटल पहल शुरू करने के लिए समय को काफी कम कर सकती है।
(केएनएन ब्यूरो)