नई दिल्ली, 29 नवंबर (केएनएन) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत की आर्थिक ताकत, तकनीकी प्रगति और सैद्धांतिक विदेश नीति ने इसे हिंद-प्रशांत और वैश्विक दक्षिण में संतुलन और विश्वसनीयता की आवाज के रूप में स्थापित किया है।
नई दिल्ली में चाणक्य रक्षा संवाद 2025 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा भूराजनीतिक अनिश्चितता, आतंकवाद और सूचना युद्ध रक्षा सुधारों को आवश्यक बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सीमा और समुद्री बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है, सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में तेजी लाई है और आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा दिया है।
मंत्री ने लचीलेपन के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि भारत के सशस्त्र बल राष्ट्रीय स्थिरता का एक प्रमुख स्तंभ बने हुए हैं, जो सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया, समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी में योगदान दे रहे हैं।
सिंह ने कहा कि भारत शांति और बातचीत का समर्थन करता है, लेकिन वह संप्रभुता या सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश का सुधार आधारित विकास और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा वैश्विक स्थिरता में योगदान देता है।
भारतीय सेना और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलएडब्ल्यूएस) द्वारा आयोजित कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, सिंह ने प्रमुख रक्षा डिजिटलीकरण और हरित पहल की एक श्रृंखला का अनावरण किया।
इनमें प्रोजेक्ट ईकेएएम, एक एआई-ए-ए-सर्विस प्लेटफॉर्म शामिल है, जिसे मजबूत डेटा सुरक्षा के साथ सैन्य उपयोग के लिए स्वदेशी एआई मॉडल तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उन्होंने सेना के संचालन और नागरिक अधिकारियों दोनों का समर्थन करने के लिए भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन की भविष्यवाणी करने में सक्षम एक सैन्य जलवायु विज्ञान प्रणाली प्रक्षेपन भी लॉन्च किया।
रक्षा नेतृत्व को कमांड, इंटेलिजेंस और स्वायत्त प्रणालियों में एआई को एकीकृत करने में मदद करने के लिए सैन्य नेताओं के लिए एक एआई हैंडबुक पेश की गई थी।
इसके अतिरिक्त, डिजिटलाइजेशन 3.0 पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसमें सेना द्वारा अपने एआई तत्परता अभियान के हिस्से के रूप में 100 डिजिटल अनुप्रयोगों को अपनाने पर प्रकाश डाला गया।
इस कार्यक्रम में ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड परियोजना का भी शुभारंभ हुआ, जो जीवाश्म-ईंधन जनरेटर पर निर्भरता को कम करने के लिए लद्दाख में सेना प्रतिष्ठानों के लिए एनटीपीसी द्वारा विकसित एक स्वच्छ-ऊर्जा उच्च-ऊंचाई वाली बिजली प्रणाली है।
दो दिवसीय संवाद भारत की उभरती सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी सीमाओं पर केंद्रित है।
(केएनएन ब्यूरो)