नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (केएनएन) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के लिए बातचीत में एक मुकाम पर पहुंच गए हैं, जिससे दोनों ओर से और रियायतें मिलना मुश्किल हो सकता है।
नई दिल्ली में म्यूनिख नेताओं की बैठक में सीतारमण ने कहा, “समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है, हालांकि हम यह मानना चाहेंगे कि दोनों पक्ष एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जिसके आगे देना या लेना बहुत मुश्किल हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए जगह मिले तो आगे प्रगति संभव है।
अमेरिकी व्यापार घाटा मुख्य मुद्दा बना हुआ है
सीतारमण ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को लेकर चिंतित है और ऐसे असंतुलन को दूर करने के लिए बातचीत के साथ-साथ टैरिफ का इस्तेमाल भी बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि व्यापार अंतराल को पारंपरिक रूप से पारस्परिक बाजार पहुंच और रियायतों पर बातचीत के माध्यम से संबोधित किया जाता था, लेकिन अब इस उद्देश्य के लिए टैरिफ को तेजी से “हथियार” दिया जा रहा है।
सीतारमण ने इसकी तुलना 2014 के बाद से चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार असंतुलन से करते हुए कहा कि देश इस तरह के अंतराल को दूर करने के लिए पारंपरिक बातचीत से परे तेजी से सोच रहे हैं।
आपूर्ति शृंखलाएं द्विपक्षीय सौदे चलाती हैं
सीतारमण ने कहा कि आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा व्यापार समझौतों में एक महत्वपूर्ण विचार बन गई है क्योंकि देश व्यवधानों के बाद वैकल्पिक भागीदारों की तलाश कर रहे हैं।
वित्त मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जहां आपूर्ति श्रृंखलाएं पहले ही बाधित हो चुकी हैं, देश निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए नए भागीदारों की तलाश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय व्यापार संस्थानों का कमजोर होना द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समझौतों को और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है, हालांकि देश बहुपक्षीय ढांचे के माध्यम से जुड़ना जारी रखेंगे।
उनकी टिप्पणियों से पता चलता है कि भारत-अमेरिका वार्ता एक कठिन चरण में प्रवेश कर चुकी है, जबकि बाजार पहुंच, टैरिफ, व्यापार असंतुलन और व्यापक आर्थिक हितों पर चर्चा जारी है।
(केएनएन ब्यूरो)

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