
CBSE 12वीं रिजल्ट और रिवैल्यूएशन विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सऊदी अरब के छात्र प्रणसू पटेल ने परिणाम जारी न होने और खाली मार्कशीट को लेकर याचिका दायर की है।
CBSE रिजल्ट विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सऊदी अरब के छात्र की याचिका पर आज अहम सुनवाई
खाली मार्कशीट, लंबित रिजल्ट और रिवैल्यूएशन की शिकायतों के बीच छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद
नई दिल्ली, 8 जून (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा के परिणाम और रिवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गए हैं। सऊदी अरब में रह रहे भारतीय छात्र प्रणसू जिगरकुमार पटेल ने अपनी मार्कशीट और परिणाम से जुड़ी समस्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर आज 8 जून को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर के कई छात्र रिवैल्यूएशन, उत्तर पुस्तिका की कॉपी प्राप्त करने और परिणाम संबंधी तकनीकी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। कई छात्रों ने दावा किया है कि उन्हें अधूरी या खाली मार्कशीट जारी की गई, जबकि कुछ को निर्धारित समय के बावजूद उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां नहीं मिल सकीं।
क्या है प्रणसू पटेल का मामला?
प्रणसू जिगरकुमार पटेल सऊदी अरब में रहकर CBSE से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। उनके अनुसार उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस विषयों की इंप्रूवमेंट परीक्षा के लिए आवेदन किया था। उन्होंने कुछ विषयों की परीक्षा दी, लेकिन मध्य पूर्व क्षेत्र में उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों के कारण कुछ परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।
ऐसी स्थिति में CBSE ने प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन नीति लागू की थी। प्रणसू का आरोप है कि उन्हें इस विशेष व्यवस्था का लाभ नहीं दिया गया और उनका परिणाम अब तक जारी नहीं किया गया है। परिणाम लंबित रहने के कारण उनकी उच्च शिक्षा की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
छात्र ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि बोर्ड को उनका परिणाम जारी करने का निर्देश दिया जाए। वैकल्पिक रूप से उन्होंने रद्द हुई परीक्षाओं का पुनः आयोजन कराने की भी मांग की है ताकि उन्हें निष्पक्ष अवसर मिल सके।
भविष्य पर मंडरा रहा अनिश्चितता का खतरा
याचिका में कहा गया है कि परिणाम जारी न होने के कारण बीटेक समेत विभिन्न व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। छात्र का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है।
प्रणसू ने अदालत को बताया है कि जिन अन्य छात्रों की परीक्षाएं प्रभावित हुई थीं, उन्हें विशेष मूल्यांकन नीति का लाभ मिला, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया। इससे उनके साथ समानता के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है।
अधिवक्ता विनीत जिंदल ने उठाया मामला
इस मामले में अधिवक्ता विनीत जिंदल ने छात्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआत में उन्हें इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन जब उन्होंने छात्र की मार्कशीट देखी तो पाया कि उसमें अंक दर्ज ही नहीं थे।
उनके अनुसार कई छात्रों के परिणामों और मार्कशीट से जुड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके बाद उन्होंने छात्र की ओर से सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। आज होने वाली सुनवाई पर बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हुई हैं।
खाली मार्कशीट की शिकायतें केवल विदेश तक सीमित नहीं
यह विवाद केवल विदेश में रहने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है। भारत में भी कई छात्रों ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र के कक्षा 12 के छात्र तनिष्क वत्स ने दावा किया कि उन्हें भी प्रारंभिक रूप से खाली मार्कशीट प्राप्त हुई थी। छात्र के अनुसार जब उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्हें CBSE से संपर्क करने को कहा गया।
बताया जाता है कि प्रारंभिक स्तर पर उन्हें उत्तर पुस्तिका के स्कैन न हो पाने जैसी तकनीकी वजहें बताई गईं। बाद में संशोधित रिकॉर्ड जारी होने पर उन्हें 81 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। इस घटना ने मूल्यांकन और डिजिटाइजेशन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
रिवैल्यूएशन और OSM प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
इस वर्ष परिणाम घोषित होने के बाद से कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करने, रिवैल्यूएशन आवेदन और ऑनलाइन सेवाओं को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। छात्रों का कहना है कि पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें लगातार बनी हुई हैं।
कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें समय पर जवाब नहीं मिला। कुछ छात्रों को उत्तर पुस्तिका की प्रतियां निर्धारित समयसीमा से काफी देर बाद प्राप्त हुईं। इससे रिवैल्यूएशन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्रों को समान प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा है तो बोर्ड को पारदर्शी तरीके से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और प्रभावित छात्रों को समयबद्ध समाधान उपलब्ध कराना चाहिए।
सुनवाई पर टिकी हैं उम्मीदें
आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई केवल एक छात्र के परिणाम तक सीमित नहीं मानी जा रही है। यदि अदालत इस मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्देश जारी करती है, तो उसका असर उन अन्य छात्रों पर भी पड़ सकता है जो परिणाम, मूल्यांकन या मार्कशीट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही पर टिकी हैं। अदालत का फैसला यह तय कर सकता है कि प्रभावित छात्रों को राहत किस रूप में मिलेगी और CBSE को अपनी प्रक्रियाओं में क्या सुधार करने होंगे।
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