
CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन विवाद में छात्र का दावा सही निकला। बोर्ड ने माना कि गलत Physics आंसर शीट भेजी गई थी और अब सही कॉपी ईमेल से भेज दी गई है।
CBSE री-इवैल्यूएशन विवाद: छात्र की शिकायत सही निकली, बोर्ड ने बदली हुई आंसर शीट की गलती मानी
स्कैन कॉपी में दूसरी हैंडराइटिंग मिलने का दावा हुआ सही, CBSE ने भेजी सही Physics उत्तर-पुस्तिका
नई दिल्ली, 26 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क}: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर उठा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिस छात्र ने दावा किया था कि उसे फिजिक्स विषय की जो स्कैन कॉपी भेजी गई, वह उसकी नहीं है, उसका दावा सही साबित हुआ है। बोर्ड ने मामले की जांच के बाद गलती स्वीकार करते हुए छात्र को उसकी सही उत्तर-पुस्तिका भेज दी है।
यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। छात्र वेदांत ने आरोप लगाया था कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत उसे जो Physics की स्कैन कॉपी मिली, उसमें लिखावट उसकी नहीं थी। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच CBSE की मूल्यांकन और स्कैनिंग प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे थे।
अब बोर्ड ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए माना है कि छात्र की उत्तर-पुस्तिका की सही कॉपी पहले साझा नहीं हुई थी और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।
छात्र ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
वेदांत नाम के छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि उसे आखिरकार उसकी सही Physics उत्तर-पुस्तिका मिल गई है। छात्र के अनुसार, CBSE अधिकारियों ने शाम को संपर्क किया और उसकी वास्तविक स्कैन कॉपी उसके रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजी।
छात्र ने पोस्ट में लिखा कि उसका दावा पूरी तरह सही था और वास्तव में उत्तर-पुस्तिका बदल गई थी। उसने कहा कि अब उसे बोर्ड से सही कॉपी प्राप्त हो गई है।
CBSE ने आधिकारिक बयान में क्या कहा
CBSE ने भी अपने आधिकारिक X अकाउंट पर इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी। बोर्ड ने कहा कि छात्र द्वारा उठाई गई चिंता की समीक्षा की गई और जांच के बाद सही उत्तर-पुस्तिका ईमेल के माध्यम से भेज दी गई है।
बोर्ड ने यह भी कहा कि जहां आवश्यक होगा, वहां परिणाम अपडेट करने की प्रक्रिया भी की जा रही है। साथ ही छात्र के धैर्य और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला तब सामने आया जब 12वीं कक्षा के छात्र वेदांत ने फिजिक्स में उम्मीद से काफी कम अंक आने के बाद री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तर-पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगवाई थी।
छात्र के अनुसार, उसे पहले से ही संदेह था कि Physics में मिले अंक उसकी अपेक्षा से बेहद कम हैं। इसलिए उसने यह जानने के लिए आवेदन किया कि आखिर नंबर कहां कटे हैं।
वेदांत ने बताया कि उसने केवल Physics ही नहीं बल्कि Maths, English और Computer Science विषयों की स्कैन कॉपी के लिए भी आवेदन किया था। बोर्ड की ओर से उसे एक ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें सभी विषयों की उत्तर-पुस्तिकाओं के लिंक भेजे गए थे।
“यह मेरी हैंडराइटिंग नहीं है”
छात्र ने दावा किया कि जब उसने Physics की उत्तर-पुस्तिका खोली तो वह हैरान रह गया। उसने कहा कि शुरुआत में रोल नंबर उसका दिखाई दे रहा था, लेकिन आगे की लिखावट उसकी नहीं थी।
वेदांत ने वीडियो के माध्यम से अपनी English उत्तर-पुस्तिका भी दिखाई, जिसमें उसकी अपनी हैंडराइटिंग स्पष्ट नजर आ रही थी। उसने कहा कि English में उसे 91 अंक मिले हैं और उस कॉपी की लिखावट उसकी है, जबकि Physics की कॉपी पूरी तरह अलग है।
छात्र का कहना था कि कोई भी व्यक्ति दोनों कॉपियों की हैंडराइटिंग देखकर अंतर समझ सकता है।
मीडिया के सामने भी दोहराई शिकायत
मामला बढ़ने के बाद मीडिया संस्थानों ने भी छात्र से बातचीत की। कैमरे के सामने वेदांत ने अपनी Physics उत्तर-पुस्तिका दिखाते हुए कहा कि वह कॉपी उसकी नहीं है।
उसने कहा कि छात्र पूरे साल मेहनत करते हैं और परीक्षा देते हैं, ऐसे में यदि उत्तर-पुस्तिकाओं की स्कैनिंग या टैगिंग में गलती होती है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है।
वेदांत ने यह भी मांग की कि CBSE अपनी OSM टैगिंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट कराए ताकि ऐसी गलतियां दोबारा न हों।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई है। कुछ लोगों ने सवाल किया कि यदि एक छात्र के मामले में ऐसी गलती हो सकती है, तो अन्य मामलों में भी जांच की जरूरत हो सकती है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह तकनीकी त्रुटि थी, मानवीय गलती थी या स्कैनिंग प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई।
री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पर उठे सवाल
CBSE हर साल छात्रों को उत्तर-पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने और री-इवैल्यूएशन का विकल्प देता है। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना होता है। लेकिन इस घटना ने उसी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड को इस मामले की विस्तृत जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी छात्र को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
आगे क्या हो सकता है
अब निगाहें इस बात पर हैं कि CBSE इस मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट जारी करता है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि छात्र के Physics के अंक अपडेट होते हैं या नहीं।
यदि बोर्ड इस मामले में प्रणालीगत खामियों को स्वीकार करता है, तो आने वाले समय में स्कैनिंग, डिजिटाइजेशन और उत्तर-पुस्तिका सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव संभव है।
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