बिहार: नियोजित शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, बिना परीक्षा पास किए नहीं मिलेगा प्रशिक्षित वेतनमान

file_00000000a74871fa91f5b63d58925f94 बिहार: नियोजित शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, बिना परीक्षा पास किए नहीं मिलेगा प्रशिक्षित वेतनमान

बिहार शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए 2015-17 और 2017-18 सत्र के प्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया है। बिना TET पास किए प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ नहीं मिलेगा।


TET पास किए बिना नहीं मिलेगा प्रशिक्षित वेतनमान, बिहार शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला

2015-17 और 2017-18 सत्र के नियोजित शिक्षकों पर असर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ निर्देश


पटना, 23 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क) : बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत नियोजित शिक्षकों को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 2015-17 और 2017-18 सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को अब प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ तभी मिलेगा, जब वे शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET उत्तीर्ण करेंगे। इस निर्णय के बाद राज्यभर में हजारों शिक्षकों के बीच चिंता और चर्चा का माहौल है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार केवल डीएलएड या अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा कर लेने से प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ नहीं मिलेगा। विभाग ने TET को अनिवार्य पात्रता शर्त के रूप में लागू किया है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर आदेश के सख्ती से पालन को सुनिश्चित करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला नियम
जानकारी के मुताबिक यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के बाद लिया गया है। “राज्य सरकार एवं अन्य बनाम मनोज कुमार एवं अन्य” मामले में 16 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था। अदालत के आदेश के अनुपालन में बिहार शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षित वेतनमान को TET योग्यता से जोड़ने का निर्णय लिया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने शिक्षक नियुक्ति और वेतनमान से जुड़े मामलों में पात्रता की स्पष्ट व्याख्या की थी। उसी आधार पर अब प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य माना गया है।
विरमन तिथि से मिलेगा लाभ
नए आदेश के मुताबिक संबंधित शिक्षकों को उनकी विरमन तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ तभी दिया जाएगा, जब वे TET परीक्षा पास करेंगे। इसका मतलब यह है कि प्रशिक्षण प्रमाणपत्र होने के बावजूद TET पास नहीं करने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतनमान नहीं मिल सकेगा।
शिक्षा विभाग का तर्क है कि TET परीक्षा शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता और शिक्षण क्षमता की जांच का मानक माध्यम है। इसलिए गुणवत्ता आधारित शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक माना गया है।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का दावा
शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। विभाग के अनुसार केवल प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं माना जा सकता, बल्कि शिक्षकों की विषयगत समझ और शिक्षण दक्षता का मूल्यांकन भी जरूरी है। इसी कारण TET को प्रशिक्षित वेतनमान से जोड़ा गया है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में नियुक्ति और सेवा शर्तों में भी गुणवत्ता आधारित मानकों को और सख्त किया जा सकता है। सरकार का फोकस अब केवल नियुक्ति पर नहीं बल्कि शिक्षण स्तर सुधारने पर भी है।
शिक्षक संगठनों में नाराजगी
इस फैसले के बाद कई शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। नियोजित शिक्षक संघों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्त लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों ने पहले से प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया और लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें अब अतिरिक्त पात्रता शर्तों में बांधना उचित नहीं होगा।
कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि सरकार को पहले पर्याप्त संख्या में TET परीक्षा आयोजित करनी चाहिए और शिक्षकों को तैयारी के लिए समय देना चाहिए। कई शिक्षक इस फैसले को अपने आर्थिक भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रहे हैं।
हजारों शिक्षकों के सामने नई चुनौती
राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे नियोजित शिक्षक हैं जिन्होंने निर्धारित सत्र में प्रशिक्षण तो पूरा कर लिया, लेकिन अब तक TET परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। नए आदेश के बाद ऐसे शिक्षकों पर सीधा असर पड़ सकता है। प्रशिक्षित वेतनमान नहीं मिलने से उनकी आय और सेवा लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को आदेश का समय पर पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि इससे भविष्य में किसी तरह की कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं से बचा जा सकेगा।
फिलहाल इस फैसले को लेकर शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में शिक्षक संगठन सरकार से राहत या संशोधन की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति भी बना सकते हैं।



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