होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब तमाशबीन नहीं रह सकता
होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब चुप नहीं रह सकता
अगर होर्मुज़ में संकट गहराता है, तो उसका असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। तेल, व्यापार, महँगाई और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर इसका सीधा असर दक्षिण एशिया को भी झेलना पड़ेगा। ऐसे समय में ग्लोबल साउथ की कूटनीति कोई आदर्शवादी बात नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक ज़रूरत है।
पश्चिम एशिया का युद्ध अगर समुद्र तक पहुँचा, तो उसकी लहरें दक्षिण एशिया की जेब तक आएँगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब केवल उस क्षेत्र की सीमाओं में बंद संकट नहीं रह गया है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तक अस्थिरता फैलती है, तो उसका असर सीधे दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ेगा। तेल के दाम, व्यापारिक आवाजाही, शिपिंग लागत और महँगाई — सब इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे...

