Tag: तेल संकट

होर्मुज़ पर ईरान का ‘टोल सिस्टम’, तेल सप्लाई पर असर
ईरान, स्पेशल रिपोर्ट

होर्मुज़ पर ईरान का ‘टोल सिस्टम’, तेल सप्लाई पर असर

जग वाणी | अंतरराष्ट्रीय / विशेष रिपोर्ट तेहरान/नई दिल्ली/वैश्विक डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक, Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान अब एक तरह का ‘टोल बूथ’ सिस्टम लागू कर रहा है, जिसमें जहाजों को गुजरने के लिए अनुमति, जांच और शुल्क देना पड़ रहा है। ‘टोल बूथ’ सिस्टम: जहाजों पर सख्त नियंत्रण ताज़ा रिपोर्ट्स बताती हैं कि: जहाजों को ईरानी सुरक्षा एजेंसियों से मंजूरी लेनी पड़ रही है कुछ मामलों में सुरक्षित मार्ग के बदले भुगतान भी किया जा रहा है ट्रांजिट के लिए तय कॉरिडोर और एस्कॉर्ट सिस्टम लागू है इसे वैश्विक शिपिंग विशेषज्ञों ने “de facto toll regime” बताया है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों पर सवाल खड़े करता है। केवल ‘दोस्त देशों’ को छूट ईरान ने इस रणनीत...
Trump ने ईरान पर हमले 10 दिन रोके, बातचीत जारी
अमेरिका

Trump ने ईरान पर हमले 10 दिन रोके, बातचीत जारी

जग वाणी | अंतरराष्ट्रीय समाचार वॉशिंगटन/तेहरान: Donald Trump ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए 10 दिनों के लिए रोक (pause) बढ़ा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान के साथ चल रही बातचीत “काफी अच्छी” और “जारी” है, हालांकि जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। 10 दिन की मोहलत, बातचीत पर जोर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले फिलहाल टाल दिए गए हैं और नई समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। उनका कहना है कि यह फैसला कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वॉशिंगटन किसी सैन्य कार्रवाई से पहले समझौते की संभावना को पूरा मौका देना चाहता है। जमीनी हकीकत: हमले जारी हालांकि बातचीत की बात हो रही है, लेकिन संघर्ष थमा नहीं है। ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं अमेरिकी ...
होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब तमाशबीन नहीं रह सकता
विश्लेषण, संपादकीय

होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब तमाशबीन नहीं रह सकता

होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब चुप नहीं रह सकता अगर होर्मुज़ में संकट गहराता है, तो उसका असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। तेल, व्यापार, महँगाई और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर इसका सीधा असर दक्षिण एशिया को भी झेलना पड़ेगा। ऐसे समय में ग्लोबल साउथ की कूटनीति कोई आदर्शवादी बात नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक ज़रूरत है। पश्चिम एशिया का युद्ध अगर समुद्र तक पहुँचा, तो उसकी लहरें दक्षिण एशिया की जेब तक आएँगी। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब केवल उस क्षेत्र की सीमाओं में बंद संकट नहीं रह गया है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तक अस्थिरता फैलती है, तो उसका असर सीधे दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ेगा। तेल के दाम, व्यापारिक आवाजाही, शिपिंग लागत और महँगाई — सब इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे...