भारत की एफडीआई नीति का अगला चरण निवेशकों को बनाए रखने, विस्तार पर केंद्रित होना चाहिए: एसोचैम
नई दिल्ली, 22 सितंबर (केएनएन) एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार, भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के अगले चरण में पूंजी को आकर्षित करने से आगे बढ़कर ऐसी स्थितियां बनानी चाहिए जो निवेशकों को घरेलू अर्थव्यवस्था के साथ अपने संचालन को अधिक गहराई से बनाए रखने, विस्तार करने और एकीकृत करने में सक्षम बनाए।
अध्ययन में कहा गया है कि भारत के एफडीआई परिदृश्य में पिछले 25 वर्षों में काफी विस्तार हुआ है, कुल एफडीआई प्रवाह वित्त वर्ष 2000-01 में 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। इसी अवधि के दौरान एफडीआई इक्विटी प्रवाह 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 59 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2000-01 और वित्त वर्ष 2025-26 के बीच, भारत को 1.16 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का संचयी एफडीआई प्रवाह प्राप्त हुआ, जिसमें एफड...