एमएसएमई मंत्रालय ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों के लिए प्रदर्शनी-व्यापार मेले का आयोजन किया

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लुधियाना, 14 सितंबर (केएनएन) केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने लुधियाना के पंजाब व्यापार केंद्र में तीन दिवसीय प्रदर्शनी और व्यापार मेले का आयोजन किया है, जिसमें प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों के काम को प्रदर्शित किया जाएगा।

गुरुवार को शुरू हुआ यह कार्यक्रम शनिवार को समाप्त होगा।

पिछले वर्ष 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य 18 पारंपरिक व्यवसायों में लगे शिल्पकारों को सहायता प्रदान करना है।

यह पहल पूरे भारत में कारीगरों और शिल्पकारों के लिए औपचारिक मान्यता, प्रशिक्षण कार्यक्रम, वित्तीय सहायता और विपणन सहायता सहित एक व्यापक पैकेज प्रदान करती है।

एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त विकास आयुक्त संजीव चावला ने मेले का उद्घाटन किया, जिसमें पंजाब के विभिन्न जिलों के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए लगभग 70 स्टॉल लगाए गए थे।

यह आयोजन लाभार्थियों के लिए अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने तथा विपणन अवसरों तक पहुंच बनाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।

पीएम विश्वकर्मा योजना कारीगरों को बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण के साथ-साथ 15,000 रुपये तक के मूल्य के टूलकिट भी प्रदान करती है।

यह 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की रियायती ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का ऋण भी प्रदान करता है, साथ ही डिजिटल लेनदेन के लिए विपणन सहायता और प्रोत्साहन भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम के एक भाग के रूप में, मंत्रालय के अधिकारियों ने स्टालों का दौरा किया और प्रतिभागियों से बातचीत की तथा उन्हें योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

राष्ट्रीय योजना के विभिन्न पहलुओं को समझाने के लिए एक सेमिनार भी आयोजित किया गया, जिसमें लुधियाना की एमएसएमई की सहायक निदेशक इशिता थमन ने इस पहल पर एक प्रस्तुति दी।

थमन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेले का उद्देश्य प्रदर्शकों को विपणन सहायता प्रदान करना है।

उन्होंने कारीगरों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के लिए बैंकिंग संस्थानों और कौशल विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। इसके अलावा, कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से नए लाभार्थियों के ऑन-साइट पंजीकरण के लिए प्रावधान किए गए हैं।

यह आयोजन पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करता है, साथ ही कारीगरों को आधुनिक उपकरणों और बाजार तक पहुंच प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाता है।

(केएनएन ब्यूरो)



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