
संवैधानिक विद्वान राजीव धवन ने यहां शनिवार (25 जनवरी, 2025) को कहा कि कई राज्यों में राज्यपाल केवल केंद्र के लिए हिटमैन के रूप में कार्य करके संघवाद और लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।
श्री धवन ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में संविधान पर एक सम्मेलन में कहा, “वर्तमान भारत में संवैधानिक योजना के तहत परिकल्पित नियंत्रण और संतुलन ध्वस्त हो गए हैं।” उन्होंने कहा, राज्यपालों की नियुक्ति का एक बेहतर तरीका होना चाहिए और मौजूदा जीएसटी व्यवस्था ने राजकोषीय संघवाद को नष्ट कर दिया है। श्री धवन ने कहा, “जब राज्यों को वित्त के लिए केंद्र से भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है तो हम राजकोषीय संघवाद नहीं अपना सकते।”
उन्होंने कहा, संवैधानिक योजना को बहाल करने का एकमात्र तरीका संवैधानिक ढांचे के भीतर लोगों की सक्रियता है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बलवीर अरोड़ा ने कहा, “एकरूपता के बिना एकता अधिक परिपूर्ण संघ की कुंजी है।”
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन लोकुर (सेवानिवृत्त) ने कहा, संघवाद संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है। संसद को राजनीतिक कार्यपालिका के अधीन कर दिया गया है, जिससे लोकतंत्र और संघवाद कमज़ोर हो गया है। उन्होंने कहा कि वह इंदिरा गांधी ही थीं जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए कार्यकारी सर्वोच्चता की इस प्रवृत्ति को गति दी थी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की विजिटिंग प्रोफेसर नीरा चंडोके ने बात की
प्रकाशित – 25 जनवरी, 2025 11:05 अपराह्न IST

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