
नई दिल्ली: की पहली बैठक संयुक्त संसदीय समिति ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर (जेपीसी) की बैठक बुधवार को होनी है, जिसमें प्राथमिक ध्यान सदस्यों को दो प्रमुख विधेयकों से परिचित कराने पर होगा।
तीखी बहस के बाद ये बिल 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किए गए थे। भाजपा के पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी में 39 सदस्य शामिल हैं, जिनमें 27 लोकसभा से और 12 राज्यसभा से हैं, जो राजनीतिक दलों के व्यापक स्पेक्ट्रम को दर्शाते हैं।
यह विधायी प्रस्ताव मोदी द्वारा समर्थित भाजपा का एक दीर्घकालिक एजेंडा रहा है, जो इसे चुनावों की आवृत्ति को कम करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखता है, जिससे लागत बचत होती है और शासन के लिए अधिक समय मिलता है। विपक्ष ने विधेयकों को ”तानाशाहीपूर्ण” बताया है। सूत्रों ने कहा कि बुधवार को होने वाली चर्चा चुनावी प्रणाली में इस तरह के बदलाव को लागू करने के कानूनी, संवैधानिक और तार्किक पहलुओं को समझने के इर्द-गिर्द घूमेगी। जेपीसी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।

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