नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (केएनएन) नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम के अनुसार, भारत के औद्योगिक क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, जिससे देश आने वाले वर्षों में 9 प्रतिशत से अधिक आर्थिक विस्तार हासिल करने की स्थिति में है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसआई) के जारी होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए, सुब्रमण्यम ने हाल के वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला।
सुब्रमण्यम ने कहा, “भारत का औद्योगिक क्षेत्र प्रभावशाली गति से विस्तार कर रहा है, जो हमें निकट भविष्य में 9 प्रतिशत या उससे अधिक जीडीपी वृद्धि का वास्तविक लक्ष्य रखने की अनुमति देता है।”
उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास को गति दे रहा है, बल्कि बड़ी संख्या में नौकरियां भी पैदा कर रहा है, जो समावेशी विकास सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कारक है।
सम्मेलन के दौरान जारी एएसआई डेटा ने इस आशावाद को रेखांकित किया। विनिर्माण उद्योगों में कार्यरत लोगों की संख्या 2022-23 में 7.5 प्रतिशत बढ़कर 1.85 करोड़ (18.5 मिलियन) तक पहुंच गई, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 1.72 करोड़ (17.2 मिलियन) थी। यह वृद्धि रोजगार सृजन और राष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता दोनों में क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
विनिर्माण क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन को सरकारी नीतियों और निजी क्षेत्र के निवेश के संयोजन से बढ़ावा मिला है। ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं जैसी पहलों ने औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योगदान दिया है।
इसके अतिरिक्त, बढ़ते स्वचालन, तकनीकी अपनाने और बेहतर बुनियादी ढांचे ने उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया है।
सुब्रमण्यम ने इस बात पर जोर दिया कि श्रम कानूनों और कराधान में सुधारों के साथ-साथ व्यापार करने में आसानी पर सरकार के फोकस ने औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने में मदद की है।
उन्होंने कहा, “हमने एक ढांचा तैयार किया है, जहां उद्योग फल-फूल सकते हैं और परिणाम स्पष्ट हैं। लगातार नीति समर्थन के साथ, भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की राह पर है।”
विनिर्माण क्षेत्र के मजबूत विकास पथ का प्रौद्योगिकी से लेकर सेवा क्षेत्रों तक विभिन्न उद्योगों पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे भारत की व्यापक आर्थिक संभावनाएं और मजबूत होंगी।
जैसे-जैसे देश अपनी औद्योगिक रीढ़ मजबूत कर रहा है, नीति निर्माताओं को भरोसा है कि भारत आने वाले दशक में टिकाऊ, उच्च गति वाली आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकता है।
(केएनएन ब्यूरो)

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