मनरेगा 2017 रिपोर्ट: जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक वृद्धि

MNREGA मनरेगा 2017 रिपोर्ट: जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक वृद्धि

मनरेगा के तहत जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक उछाल

नई दिल्ली | (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के क्रियान्वयन में वर्ष 2017 की पहली तिमाही के दौरान अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2017 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूरी की मांग में भारी वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य केंद्र जल संरक्षण कार्य रहा है।

रोजगार और भुगतान: एक नया कीर्तिमान

वर्तमान में लगभग 75 करोड़ व्यक्ति दिवस का काम पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अनुमान है कि 15 जुलाई 2017 तक यह संख्या और बढ़ेगी। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्रतिदिन 80 लाख से 1 करोड़ लोग मनरेगा के तहत कार्यरत हैं।

प्रशासनिक दक्षता में सुधार का सबसे बड़ा प्रमाण भुगतान प्रक्रिया में दिखता है:

  • समयबद्ध भुगतान: 86% से अधिक श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी मिल रही है।
  • डिजिटल पारदर्शिता: 99% भुगतान अब इलेक्ट्रॉनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (e-FMS) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है।
  • केंद्रराज्य समन्वय: केंद्र सरकार द्वारा समय पर कोष जारी करने और राज्यों द्वारा कार्यान्वयन प्रणाली को मजबूत करने से यह सुधार संभव हुआ है।

कृषि और जल संरक्षण पर विशेष बल

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कार्यक्षेत्र के कुल व्यय का 74% हिस्सा कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर खर्च किया जा रहा है।

  • प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन: जल संचयन के लिए देश के 2,264 ब्लॉकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • बुनियादी ढांचा: इस वित्तीय वर्ष में अब तक 2.62 लाख जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए हैं, जिनमें 1,31,789 खेत तालाब शामिल हैं।
  • सिंचाई क्षमता: आर्थिक विकास संस्थान (IEG), नई दिल्ली के शुरुआती आकलन के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मनरेगा ने 91 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षमता का सृजन किया है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट 30 सितंबर 2017 तक आने की संभावना है।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता

मनरेगा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘जियो-टैगिंग’ और ‘आधार’ का व्यापक उपयोग किया जा रहा है:

  1. जियोटैगिंग: लगभग 1.45 करोड़ परिसंपत्तियां भू-चिन्हित की जा चुकी हैं और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
  2. आधार लिंकेज: 5.2 करोड़ कामगार आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) से जुड़ चुके हैं, जबकि 9 करोड़ से अधिक श्रमिकों ने अपनी जानकारी साझा करने की सहमति दी है।
  3. कार्ड सत्यापन: 87% जॉब कार्ड सत्यापित किए गए हैं। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए 1.1 करोड़ कार्ड रद्द किए गए, जबकि 89 लाख नए पात्र वंचित परिवारों को जोड़ा गया है।

सामाजिक अंकेक्षण और कौशल विकास

जवाबदेही तय करने के लिए 24 राज्यों में स्वतंत्र सामाजिक लेखा-परीक्षा (Social Audit) इकाइयों का गठन किया गया है। 3,100 से अधिक संसाधन व्यक्तियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही, बेयर फूट तकनीशियन‘ (BFT) 19 राज्यों में तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं।

आजीविका विविधीकरण 

सरकार केवल दिहाड़ी मजदूरी तक सीमित नहीं है। डीडीयूजीकेवाई (DDU-GKY) और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) के माध्यम से श्रमिकों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे स्वरोजगार की ओर बढ़ सकें। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को इस अभियान की धुरी बनाया गया है ताकि गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति को स्थायी रूप से सुधारा जा सके।


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