
मनरेगा के तहत जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक उछालनई दिल्ली | (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के क्रियान्वयन में वर्ष 2017 की पहली तिमाही के दौरान अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2017 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूरी की मांग में भारी वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य केंद्र जल संरक्षण कार्य रहा है। रोजगार और भुगतान: एक नया कीर्तिमानवर्तमान में लगभग 75 करोड़ व्यक्ति दिवस का काम पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अनुमान है कि 15 जुलाई 2017 तक यह संख्या और बढ़ेगी। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्रतिदिन 80 लाख से 1 करोड़ लोग मनरेगा के तहत कार्यरत हैं। प्रशासनिक दक्षता में सुधार का सबसे बड़ा प्रमाण भुगतान प्रक्रिया में दिखता है:
कृषि और जल संरक्षण पर विशेष बलग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कार्यक्षेत्र के कुल व्यय का 74% हिस्सा कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर खर्च किया जा रहा है।
डिजिटलीकरण और पारदर्शितामनरेगा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘जियो-टैगिंग’ और ‘आधार’ का व्यापक उपयोग किया जा रहा है:
सामाजिक अंकेक्षण और कौशल विकासजवाबदेही तय करने के लिए 24 राज्यों में स्वतंत्र सामाजिक लेखा-परीक्षा (Social Audit) इकाइयों का गठन किया गया है। 3,100 से अधिक संसाधन व्यक्तियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही, ‘बेयर फूट तकनीशियन‘ (BFT) 19 राज्यों में तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। आजीविका विविधीकरणसरकार केवल दिहाड़ी मजदूरी तक सीमित नहीं है। डीडीयू–जीकेवाई (DDU-GKY) और ग्रामीण स्व–रोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) के माध्यम से श्रमिकों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे स्वरोजगार की ओर बढ़ सकें। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को इस अभियान की धुरी बनाया गया है ताकि गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति को स्थायी रूप से सुधारा जा सके। |

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