मुंबई: भायखला चिड़ियाघर के बुजुर्ग हिप्पो देवा की मौत

hippo-deva-died मुंबई: भायखला चिड़ियाघर के बुजुर्ग हिप्पो देवा की मौत

मुंबई के भायखला चिड़ियाघर में 35 वर्षीय दरियाई घोड़े देवा की उम्र संबंधी समस्याओं के कारण मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद परिसर में दफनाया गया।


भायखला चिड़ियाघर के सबसे बुजुर्ग हिप्पो ‘देवा’ की मौत, 35 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

उम्र संबंधी समस्याओं के चलते मौत की आशंका, पोस्टमॉर्टम के बाद परिसर में ही दफनाया गया


मुंबई, 19 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): मुंबई के प्रसिद्ध वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान यानी भायखला चिड़ियाघर ने अपने सबसे पुराने और लोकप्रिय जानवरों में से एक को खो दिया है। चिड़ियाघर का 35 वर्षीय दरियाई घोड़ा ‘देवा’ अब इस दुनिया में नहीं रहा। चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में उसकी मौत की वजह उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं मानी जा रही हैं। हालांकि विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

देवा कई वर्षों से चिड़ियाघर का प्रमुख आकर्षण था और मुंबई आने वाले बच्चों व पर्यटकों के बीच खास पहचान रखता था। लंबे समय से वह इस उद्यान का हिस्सा था और कर्मचारियों के बीच भी काफी प्रिय माना जाता था।

पीछे छोड़ गया अपना परिवार

देवा की मौत के बाद अब चिड़ियाघर में उसकी साथी शिल्पा और उनकी दो संतानें मौजूद हैं। अधिकारियों के मुताबिक, उनकी मादा संतान का जन्म वर्ष 2010 में हुआ था, जबकि नर बछड़े का जन्म 2016 में हुआ था।

चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि बाकी तीनों दरियाई घोड़ों की नियमित निगरानी की जा रही है और पशु चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जानवरों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की समस्या को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

चिड़ियाघर के सबसे पुराने जानवरों में था देवा

देवा को भायखला चिड़ियाघर के सबसे उम्रदराज जानवरों में गिना जाता था। वह वर्षों से यहां रह रहा था और आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। कई परिवार और बच्चे खास तौर पर दरियाई घोड़ों को देखने पहुंचते थे, जिनमें देवा की पहचान सबसे अलग थी।

चिड़ियाघर के कर्मचारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से उसकी उम्र बढ़ने के कारण स्वास्थ्य में गिरावट देखी जा रही थी। पशु चिकित्सकों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही थी और आवश्यक इलाज भी दिया जा रहा था।

इससे पहले भी हुई थीं हिप्पो की मौतें

देवा की मौत से पहले भायखला चिड़ियाघर में दरियाई घोड़े की आखिरी मौत लगभग पांच साल पहले दर्ज की गई थी। इससे पहले वर्ष 2009 में पांच वर्षीय ‘शक्ति’ की फेफड़ों की विफलता के कारण मौत हो गई थी। वहीं, वर्ष 2010 में सात वर्षीय ‘जस्सी’ ने भी फेफड़ों से जुड़ी बीमारी के चलते दम तोड़ दिया था।

इन घटनाओं के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने पशुओं की चिकित्सा सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का दावा किया था।

वन्यजीव कानून के तहत हुआ पोस्टमॉर्टम

अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार देवा का पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद चिड़ियाघर परिसर के पेडक क्षेत्र में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

प्रशासन के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की विस्तृत जानकारी सामने आएगी।

चिड़ियाघर में शोक का माहौल

देवा की मौत के बाद चिड़ियाघर कर्मचारियों और नियमित आने वाले आगंतुकों के बीच शोक का माहौल है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी उसके प्रति संवेदना व्यक्त की है। लंबे समय तक चिड़ियाघर का हिस्सा रहने के कारण देवा को यहां के “पुराने सदस्य” के रूप में देखा जाता था।

विशेषज्ञों का कहना है कि कैद में रहने वाले दरियाई घोड़ों की औसत उम्र सामान्य परिस्थितियों में 35 से 45 वर्ष तक हो सकती है। ऐसे में देवा ने एक लंबा जीवन जिया।


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