
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को डॉ. अर्चना गुप्ता मौत मामले में गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया।
बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह गैर इरादतन हत्या के दोषी करार, राउज एवेन्यू कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में
नए साल की पार्टी में हर्ष फायरिंग के दौरान डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत का मामला; 9 जून को सजा पर होगी सुनवाई
नई दिल्ली, 7 जून (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): करीब साढ़े सात साल पुराने चर्चित फतेहपुर बेरी हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए बिहार के साहिबगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी करार दिया है। अदालत ने फैसला सुनाने के साथ ही विधायक को तत्काल न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब मामले में सजा की अवधि तय करने के लिए 9 जून को अंतिम बहस होगी।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राजू कुमार सिंह को दोषी माना। वहीं, पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण उनकी पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
नए साल के जश्न में हुई थी दुखद घटना
यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात का है। दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित मांडंडी फार्महाउस में नए साल के स्वागत के लिए एक भव्य पार्टी आयोजित की गई थी। फार्महाउस राजू कुमार सिंह के परिवार से जुड़ा बताया गया था। कार्यक्रम में कई प्रभावशाली लोग, कारोबारी और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां मौजूद थीं।
पार्टी में दिल्ली की प्रसिद्ध आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता भी अपने परिवार के साथ शामिल हुई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब 12 बजे नए साल के स्वागत के दौरान माहौल उत्सवपूर्ण था। इसी दौरान कथित रूप से राजू कुमार सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल और राइफल से हर्ष फायरिंग शुरू कर दी।
जश्न के बीच हुई इस फायरिंग ने कुछ ही सेकंड में पूरे माहौल को मातम में बदल दिया।
सिर में लगी गोली, एक सप्ताह बाद हुई मौत
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, फायरिंग के दौरान चली एक गोली डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी। गोली लगते ही वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन सिर में गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। बताया जाता है कि वह कोमा में चली गई थीं। घटना के लगभग एक सप्ताह बाद उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत ने दिल्ली समेत पूरे देश में गहरा आक्रोश पैदा किया था। इस घटना के बाद सार्वजनिक समारोहों में हर्ष फायरिंग की बढ़ती घटनाओं और वीआईपी संस्कृति पर व्यापक बहस छिड़ गई थी।
जांच और कानूनी प्रक्रिया
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच एजेंसियों ने फॉरेंसिक साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और हथियारों से जुड़े रिकॉर्ड एकत्र किए। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि फायरिंग सीधे तौर पर आरोपी की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार का परिणाम थी।
बचाव पक्ष ने अपनी दलीलों में विभिन्न बिंदु उठाए, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विधायक को दोषी ठहराया।
हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। इसी आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
हर्ष फायरिंग पर फिर उठे सवाल
इस फैसले के बाद एक बार फिर हर्ष फायरिंग को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शादी, जश्न और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हथियारों का प्रदर्शन कई बार जानलेवा साबित होता है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी घटनाओं के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें निर्दोष लोगों की जान गई है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार चेतावनी देती रही हैं कि लाइसेंसी हथियारों का भी सार्वजनिक प्रदर्शन या लापरवाही से उपयोग गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
9 जून को सजा पर फैसला
अब सभी की नजर 9 जून को होने वाली सुनवाई पर है। उस दिन अदालत दोषसिद्धि के बाद सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। इसके बाद यह तय होगा कि राजू कुमार सिंह को कितनी सजा दी जाएगी।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह एक जनप्रतिनिधि से जुड़े चर्चित मामले में आया है और अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून के सामने सभी नागरिक समान हैं।
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