
Ex-Muslim Saleem Vastik Arrested: 31 साल पुराने अपहरण-हत्या केस में फरार दोषी गिरफ्तार, पहचान बदलकर सोशल मीडिया
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गाजियाबाद के लोनी से आरोपी को पकड़ा; 1995 के मामले में उम्रकैद की सजा के बाद जमानत पर फरार हुआ था
नई दिल्ली, 25 अप्रैल — जग वाणी न्यूज़ डेस्क: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 1995 के बहुचर्चित अपहरण और हत्या मामले में फरार चल रहे दोषी सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक (Ex-Muslim Saleem Vastik) को गिरफ्तार कर लिया है। सलीम वास्तिक पर आरोप है कि उसने अपनी पहचान बदलकर वर्षों तक कानून से बचाव किया और हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर अलग पहचान के साथ सक्रिय रहा।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को गाजियाबाद के लोनी इलाके से पकड़ा गया। वह लंबे समय से फरार था और अपनी असली पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था। जांच एजेंसियों ने पुराने रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट और तस्वीरों के मिलान के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि की।
यह मामला वर्ष 1995 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकलपुरी इलाके से एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के बाद परिवार से फिरौती मांगी गई थी। पुलिस जांच के दौरान संदेह सलीम खान पर गया, जो उस समय बच्चे को मार्शल आर्ट्स सिखाता था।
पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया था और उसकी निशानदेही पर बच्चे का शव बरामद किया गया था। इसके बाद 1997 में अदालत ने सलीम खान और उसके सहयोगी अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई।
जमानत के बाद फरारी और पहचान बदलने की रणनीति
साल 2000 में आरोपी को दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी। इसके बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। 2011 में हाई कोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन तब तक आरोपी अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग राज्यों में रह रहा था।
जांच में सामने आया कि फरारी के दौरान उसने अपना नाम बदलकर सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक रख लिया। वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में रहकर पहचान छिपाता रहा। बताया जा रहा है कि, उसने खुद को मृत घोषित किए जाने जैसी भ्रामक रणनीतियों का भी सहारा लिया ताकि एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।
सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी हाल के वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और वीडियो बनाता था। उसकी ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और उसकी आय के स्रोत क्या थे।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच का मुख्य फोकस 1995 के मामले और फरारी के दौरान उसकी गतिविधियों पर है। किसी भी अन्य दावे या आरोप की स्वतंत्र पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।
गिरफ्तारी कैसे हुई
क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पुराने रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी की तलाश तेज की थी। फिंगरप्रिंट और अन्य पहचान संबंधी विवरणों के मिलान के बाद उसकी लोकेशन का पता लगाया गया और उसे लोनी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी लगातार ठिकाने बदलता रहा, जिससे उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। इस गिरफ्तारी को लंबे समय से लंबित मामले में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया
करीब तीन दशक पुराने इस मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी। पुलिस ने बताया कि आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम होती है। इससे पीड़ित परिवारों को भी न्याय की दिशा में उम्मीद मिलती है।
दिल्ली पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी को किन लोगों से मदद मिली और क्या उसने किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भाग लिया। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि लंबे समय तक फरार रहने वाले दोषियों की निगरानी और ट्रैकिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पुलिस की इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

जग वाणी न्यूज़ डेस्क एक समर्पित संपादकीय टीम है, जो देश-विदेश की ताज़ा ख़बरों, सामाजिक मुद्दों, राजनीति, व्यापार, शिक्षा, रोज़गार, मनोरंजन और जनहित आदि से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को सरल और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करती है। यह टीम निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए पाठकों तक सटीक, तथ्यपूर्ण और उपयोगी समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
Discover more from जग वाणी
Subscribe to get the latest posts sent to your email.