
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (केएनएन) सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) ने साउथ एशियन इंटरनेशनल इकोनॉमिक लॉ नेटवर्क (SAIELN) और इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ (ISIL) के सहयोग से, अंतरराष्ट्रीय सब्सिडी के संबंध में हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के फैसले पर नई दिल्ली में एक पैनल चर्चा का आयोजन किया।
रविवार को आयोजित चर्चा इंडोनेशिया (डीएस 616) से स्टेनलेस स्टील कोल्ड-रोल्ड फ्लैट उत्पादों पर यूरोपीय संघ (ईयू) काउंटरवेलिंग और एंटी-डंपिंग शुल्क नामक डब्ल्यूटीओ विवाद पर केंद्रित थी।
सब्सिडी नियमों की कानूनी व्याख्या
पैनल ने डब्ल्यूटीओ पैनल रिपोर्ट के कानूनी और नीतिगत निहितार्थों की जांच की, विशेष रूप से सब्सिडी और काउंटरवेलिंग उपायों पर समझौते (एससीएम समझौते) के तहत।
चर्चाएँ विदेशी या राज्य से जुड़ी संस्थाओं के वित्तीय योगदान को इंडोनेशिया सरकार को जिम्मेदार ठहराने और उन्हें प्रतिसंतुलन योग्य सब्सिडी के रूप में मानने के यूरोपीय संघ के दृष्टिकोण पर केंद्रित थीं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डब्ल्यूटीओ पैनल ने एससीएम समझौते के अनुच्छेद 1.1(ए)(1) के तहत ‘वित्तीय योगदान’ की परिभाषा को एक बंद सूची के रूप में स्पष्ट किया है, जिससे सरकार-से-सरकारी प्रोत्साहन को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
‘सार्वजनिक निकाय’ वर्गीकरण से जुड़े मुद्दे
सत्र ने ‘सार्वजनिक निकाय’ की अवधारणा को भी संबोधित किया, यह देखते हुए कि इसके निर्धारण के लिए विशुद्ध रूप से औपचारिक वर्गीकरण के बजाय किसी इकाई की विशेषताओं और सरकार के साथ उसके संबंधों के वास्तविक मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
व्यापार नीति के लिए व्यापक निहितार्थ
प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय सब्सिडी को विनियमित करने के फैसले के व्यापक निहितार्थ और वैश्विक व्यापार प्रशासन पर इसके संभावित प्रभाव पर चर्चा की।
विचार-विमर्श ने सीमा पार राज्य समर्थन तंत्र की बढ़ती जटिलता और मौजूदा डब्ल्यूटीओ ढांचे के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया।
(केएनएन ब्यूरो)

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