
हापुस आम सस्ता हुआ: एपीएमसी बाजार में आवक बढ़ने से कीमतों में बड़ी गिरावट
अक्षय तृतीया के बाद 70 हजार बॉक्स रोज़ाना पहुंच रहे, थोक से खुदरा तक उपभोक्ताओं को राहत
नवी मुंबई, 25 अप्रैल — जग वाणी न्यूज़ डेस्क: नवी मुंबई के एपीएमसी फल बाजार में कोंकण क्षेत्र से आने वाले अल्फांसो (हापुस) आम की आवक अचानक बढ़ने से कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में रोज़ाना आने वाले आम के बक्सों की संख्या बढ़कर करीब 70,000 हो गई है, जिससे थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर दरें नीचे आई हैं। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल रहा है, खासकर गर्मी के चरम मौसम में जब आम की मांग बढ़ जाती है।
आवक बढ़ी, दाम गिरे
व्यापारियों के अनुसार, कुछ दिन पहले तक बाजार में रोज़ाना करीब 55,000 बक्से पहुंच रहे थे। लेकिन अक्षय तृतीया के बाद आपूर्ति में तेज उछाल आया और यह आंकड़ा 70,000 बक्सों तक पहुंच गया। आपूर्ति बढ़ने से बाजार में संतुलन बदला और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई।
त्योहारी सीजन से पहले हापुस आम की एक पेटी 2,000 रुपये से 5,000 रुपये के बीच बिक रही थी। अब वही पेटी घटकर 1,500 रुपये से 3,000 रुपये के दायरे में आ गई है। हर पेटी में आम तौर पर 5 से 8 दर्जन आम होते हैं। इस हिसाब से थोक दर लगभग 190 रुपये से 600 रुपये प्रति दर्जन तक आ गई है।
खुदरा बाजार में भी असर
कीमतों में यह गिरावट केवल थोक बाजार तक सीमित नहीं रही। खुदरा बाजार में भी हापुस आम सस्ता हुआ है। वर्तमान में उपभोक्ताओं को गुणवत्ता के आधार पर यह आम लगभग 500 रुपये से 2,000 रुपये प्रति दर्जन की दर से मिल रहा है।
गर्मी के मौसम में आम की बढ़ती मांग के बीच कीमतों में यह कमी आम खरीदारों के लिए राहत लेकर आई है। खासकर मध्यम वर्ग के उपभोक्ता अब बेहतर गुणवत्ता वाले आम खरीदने की स्थिति में आ रहे हैं।
गुणवत्ता भी एक कारण
संजय पानसरे, जो बाजार के निदेशक हैं, ने बताया कि कम कीमत पर उपलब्ध आमों की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सस्ते दाम वाले आम आमतौर पर छोटे आकार या कम ग्रेड के होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल बेमौसम बारिश के कारण इस बार कुल उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद, मौजूदा समय में जो अधिक आवक दिख रही है, वह मुख्य रूप से बाजार में एक साथ आई खेप का परिणाम है।
पृष्ठभूमि और बाजार का रुझान
कोंकण क्षेत्र का हापुस आम देश-विदेश में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। हर साल अप्रैल-मई के बीच इसकी आवक बढ़ती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस बार भी शुरुआती ऊंचे दाम के बाद अब बाजार में संतुलन बनता दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवक इसी स्तर पर बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और स्थिरता आ सकती है। हालांकि, मौसम और निर्यात मांग जैसे कारक भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या
व्यापारियों के अनुसार, अगले दो से तीन हफ्तों तक हापुस आम की आपूर्ति उच्च स्तर पर बनी रह सकती है। इससे कीमतों में और हल्की गिरावट या स्थिरता की संभावना है। वहीं, अगर मौसम अनुकूल रहा और निर्यात बढ़ा, तो कीमतें फिर से बढ़ भी सकती हैं।

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