
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (केएनएन) वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कपड़ा निर्यात में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्तीय वर्ष में 3,09,859.3 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,16,334.9 करोड़ रुपये हो गया, जो वैश्विक बाजारों में स्थिर मांग को दर्शाता है।
प्रमुख खंडों में, रेडीमेड परिधान (आरएमजी) सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा, जिसका निर्यात साल-दर-साल 2.9 प्रतिशत बढ़कर 1,39,349.6 करोड़ रुपये हो गया। मानव निर्मित यार्न, फैब्रिक और मेड-अप में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सूती धागा, फैब्रिक, मेड-अप और हथकरघा उत्पादों में 0.4 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई।
हस्तशिल्प (हस्तनिर्मित कालीनों को छोड़कर) प्रमुख श्रेणियों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले खंड के रूप में उभरा, इस अवधि के दौरान 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अप्रैल 2025 और फरवरी 2026 के बीच 120 से अधिक गंतव्यों में निर्यात वृद्धि दर्ज की गई, जो व्यापक-आधारित विस्तार का संकेत देता है। उल्लेखनीय वृद्धि दिखाने वाले प्रमुख बाजारों में संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, जापान, मिस्र, नाइजीरिया, सेनेगल और सूडान शामिल हैं।
कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र को निर्यात प्रोत्साहन उपायों जैसे कि राज्य और केंद्रीय करों और लेवी की छूट (आरओएससीटीएल) योजना और आरओडीटीईपी योजना को 31 मार्च, 2026 से आगे बढ़ाने जैसे नीतिगत समर्थन मिलता रहा।
ईएफटीए, यूके, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ समझौतों सहित वर्ष के दौरान सरकार की मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पहल से बाजार पहुंच बढ़ाने, टैरिफ बाधाओं को कम करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण का समर्थन करने की उम्मीद है।
यह प्रदर्शन क्षेत्र के लचीलेपन और निर्यात वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने में नीति समर्थन की भूमिका को रेखांकित करता है।
(केएनएन ब्यूरो)

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