
इंडिगो और एयर इंडिया ने जून से अगस्त 2026 तक घरेलू उड़ानों में कटौती का फैसला लिया है। एयर इंडिया ने महंगे ATF और इंडिगो ने कम डिमांड को वजह बताया।
इंडिगो और एयर इंडिया ने घटाईं घरेलू उड़ानें, जून से अगस्त तक कई रूट प्रभावित
महंगे ईंधन और कम मांग के चलते एयरलाइंस ने लिया फैसला, यात्रियों को वैकल्पिक सुविधा देने का दावा
नई दिल्ली, 27 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनियां IndiGo और Air India ने घरेलू उड़ानों में अस्थायी कटौती करने का फैसला लिया है। यह कटौती मुख्य रूप से जून से अगस्त 2026 के बीच लागू रहेगी। कुछ रूटों पर उड़ानों की संख्या कम की जाएगी, जबकि कुछ जगहों पर फ्लाइटों को मर्ज भी किया जा सकता है।
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में करीब 22 प्रतिशत तक कटौती की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार यह फैसला बढ़ती एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) कीमतों और ऑपरेशनल लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण लिया गया है। एयरलाइन ने कहा कि जिन रूटों पर यात्रियों की संख्या कम है, वहां उड़ानों की फ्रीक्वेंसी घटाई जाएगी।
कंपनी के मुताबिक, इससे पहले जून से अगस्त 2026 के बीच इंटरनेशनल उड़ानों में भी लगभग 27 प्रतिशत तक कटौती की गई थी। अब उसी अवधि में कुछ घरेलू रूटों पर भी अस्थायी रूप से सेवाएं कम की जा रही हैं।
एयर इंडिया ने बयान में कहा कि वह मांग और परिचालन स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। यदि आने वाले महीनों में हालात सामान्य होते हैं और यात्रियों की संख्या बढ़ती है, तो उड़ानों को दोबारा बहाल किया जा सकता है।
एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों की फ्लाइटें प्रभावित होंगी, उन्हें वैकल्पिक उड़ानों में सीट उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के अपनी यात्रा की तारीख बदल सकेंगे या नियमानुसार पूरा रिफंड ले सकेंगे।
दूसरी ओर, इंडिगो ने अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 7 प्रतिशत तक कटौती की बात स्वीकार की है। हालांकि कंपनी ने साफ किया कि उसका फैसला महंगे ईंधन की वजह से नहीं, बल्कि कुछ रूटों पर मांग में आई कमी के कारण लिया गया है।
इंडिगो के अनुसार जून से सितंबर मध्य तक कुछ सेक्टरों में यात्रियों की संख्या सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसी को देखते हुए उड़ानों की संख्या घटाई जा रही है। एयरलाइन का कहना है कि यदि मांग बढ़ती है तो कटौती की गई उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून सीजन के दौरान कई घरेलू रूटों पर यात्रियों की संख्या में गिरावट देखी जाती है। ऐसे समय में एयरलाइंस अक्सर अपने नेटवर्क और ऑपरेशन को संतुलित करने के लिए फ्रीक्वेंसी कम करती हैं। लेकिन इस बार बढ़ती ईंधन कीमतों ने एयरलाइंस की लागत पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
एविएशन सेक्टर के जानकारों के अनुसार ATF की कीमतें एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा होती हैं। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय विमानन कंपनियों पर भी पड़ा है। इससे एयरलाइंस के लिए कम डिमांड वाले रूटों पर उड़ानें चलाना महंगा हो गया है।
इन दोनों बड़ी एयरलाइंस के अलावा कुछ अन्य घरेलू एयरलाइंस भी अपने नेटवर्क की समीक्षा कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में कुछ और कंपनियां भी सीमित अवधि के लिए उड़ानों में कटौती कर सकती हैं।
हालांकि एयरलाइंस का कहना है कि यह फैसला स्थायी नहीं है और पूरी तरह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि त्योहारों या छुट्टियों के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो उड़ानों की संख्या फिर से बढ़ाई जा सकती है।
यात्रियों के लिए यह बदलाव खासतौर पर उन शहरों में असर डाल सकता है जहां पहले से सीमित उड़ान विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे में किराए में उतार-चढ़ाव की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि एयरलाइंस फिलहाल इसे सामान्य ऑपरेशनल एडजस्टमेंट बता रही हैं।
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