ईरान का दावा: IRGC ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़े मिसाइल-ड्रोन हमले किए

IRGC-attacks-Israel ईरान का दावा: IRGC ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़े मिसाइल-ड्रोन हमले किए

इमेज क्रेडिट: तस्नीम समाचार एजेंसी

ईरान का बड़ा सैन्य दावा: IRGC ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए
‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत 100 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दागे जाने का दावा, पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा

तेहरान/नई दिल्ली, 1 अप्रैल (न्यूज़ डेस्क): ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को दावा किया कि उसने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत की गई, जिसे ईरान ने अपने सैन्य जवाबी अभियान का हिस्सा बताया है।

Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह हमले “समन्वित और बहु-आयामी” अभियान के तहत किए गए।
बयान के अनुसार:

  • 100 से अधिक भारी मिसाइलें और अटैक ड्रोन दागे गए
  • करीब 200 रॉकेट पश्चिम एशिया के अलग-अलग हिस्सों में इस्तेमाल किए गए
  • हमले का दायरा हजारों किलोमीटर तक फैला बताया गया


IRGC ने दावा किया कि इज़राइल के कई स्थानों—एलात, तेल अवीव और बनेई ब्राक—में सैन्य ठिकानों और “जमावड़ों” को निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन हमलों और भारी नुकसान के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरानी बयान में यह भी कहा गया कि बहरीन में अमेरिकी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां लगभग 80 सैनिक मौजूद थे।
इसके अलावा, अल-उदेइरी बेस पर तैनात अमेरिकी हेलीकॉप्टर यूनिट पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किए जाने का दावा किया गया, जिसमें एक हेलीकॉप्टर के नष्ट होने और अन्य के क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है।
इन दावों पर अमेरिका की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इन हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

IRGC ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई “प्रतिरोध मोर्चे” और ईरानी सशस्त्र बलों के संयुक्त प्रयास का हिस्सा है।
बयान में यह भी कहा गया कि इस संघर्ष के दौरान इस्लामी देशों के बीच एकजुटता बढ़ी है और इसे “बड़ी उपलब्धि” बताया गया।
साथ ही, ईरान ने दावा किया कि इन घटनाओं के चलते इज़राइल के कब्जे वाले क्षेत्रों में हालात कठिन हो गए हैं और वैश्विक स्तर पर भी इसके असर दिख रहे हैं।

तनाव की यह स्थिति फरवरी के अंत में उस घटना के बाद और गंभीर हो गई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की हत्या का दावा किया गया था।
ईरान के अनुसार, इसके बाद अमेरिका और इज़राइल ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें ईरान के कई सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इन हमलों में भारी नुकसान और कई लोगों के हताहत होने की बात कही गई है, हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।

ईरान ने इन हमलों को “अकारण आक्रमण” बताते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू की। इसके तहत इज़राइल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाई गईं।
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच यह टकराव अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, यदि कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया।

फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है। आने वाले दिनों में अमेरिका, इज़राइल और ईरान की प्रतिक्रियाएं तय करेंगी कि यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है। (तस्नीम न्यूज़ एजेंसी से इनपुट्स के साथ)


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