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ईरान का सख़्त रुख: “अमेरिका-इजरायल के लिए बड़ा सरप्राइज तैयार”, वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी का दावा
असममित युद्ध रणनीति पर भरोसा, अमेरिकी सैन्य दावों को बताया कमजोर और भ्रमित करने वाला
तेहरान, 5 अप्रैल (न्यूज़ डेस्क): ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है और विरोधियों के लिए एक “बड़ा सरप्राइज” तैयार है। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया योजनाबद्ध और स्पष्ट लक्ष्यों पर आधारित है।
ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने मौजूदा सैन्य हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश किसी भी तरह की जल्दबाजी या असंगठित कार्रवाई नहीं कर रहा है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य रणनीति एक तय “लक्ष्य बैंक” पर आधारित है, जिसमें हर कार्रवाई पहले से निर्धारित होती है।
अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान की आलोचना करते हुए कहा कि “गतिशील लक्ष्य” जैसे शब्द सैन्य दृष्टि से स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने इसे अमेरिकी रणनीति की कमजोरी बताते हुए कहा कि ऐसे बयान लक्ष्य निर्धारण में भ्रम को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, ईरान की नीति स्पष्ट और ठोस उद्देश्यों पर आधारित है। ईरान अपने सैन्य अभियानों में सटीकता और दीर्घकालिक रणनीति को प्राथमिकता देता है, जिससे वह धीरे-धीरे अपने विरोधियों को कमजोर कर रहा है।
ईरानी अधिकारी ने अमेरिकी सैन्य अभियानों की आलोचना करते हुए कहा कि हाल के घटनाक्रमों में कई बार विफलताएं सामने आई हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी विमानों के गिरने जैसी घटनाओं ने वाशिंगटन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं।
उनके अनुसार, इन विफलताओं के बाद अमेरिका अब सैन्य मोर्चे की कमजोरियों को छिपाने के लिए मीडिया नैरेटिव पर अधिक निर्भर हो गया है। अधिकारी ने पुलों जैसे लक्ष्यों के उल्लेख को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि यह वास्तविक सैन्य प्राथमिकताओं से भटकाव को दर्शाता है।
ईरानी पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) में विशेष दक्षता हासिल कर ली है। इस रणनीति के तहत छोटे लेकिन सटीक हमलों के जरिए बड़े और तकनीकी रूप से मजबूत दुश्मन को धीरे-धीरे कमजोर किया जाता है।
अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका का “तेज और आसान युद्ध” का दृष्टिकोण पहले ही विफल हो चुका है। उनका कहना था कि आधुनिक युद्ध में केवल तकनीकी ताकत पर्याप्त नहीं होती, बल्कि रणनीतिक धैर्य और स्थानीय परिस्थितियों की समझ भी ज़रूरी है।
तनाव की यह स्थिति 28 फरवरी की घटनाओं के बाद और गहरा गई, जब ईरान में कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की हत्या हुई। ईरान का आरोप है कि इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया।
इन हमलों में ईरान के कई सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। व्यापक हवाई हमलों से देश के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
इन हमलों के जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के जरिए उन्होंने कथित तौर पर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की जा रही है और यह तब तक जारी रहेगी जब तक उसके खिलाफ हमले बंद नहीं होते।
मौजूदा हालात में पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि संघर्ष जल्द थमने वाला नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए, तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है।

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