नई दिल्ली, 15 नवंबर (केएनएन) 14 नवंबर को बेंगलुरु में आयोजित भारत-जापान बिजनेस समिट (IJBS) के दूसरे संस्करण में, जापान के महावाणिज्य दूत नाकाने त्सुतोमु ने घोषणा की कि जापानी सरकार भारत में 5 ट्रिलियन येन (लगभग 33 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का पर्याप्त निवेश करेगी। अगले पांच वर्षों में निवेश और ऋण।
यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच गहरी होती आर्थिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिन्हें पिछले दशक में उनके सहयोग से पारस्परिक रूप से लाभ हुआ है।
भारत और जापान के बीच बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग तक विभिन्न क्षेत्रों में संबंध विकसित हुए हैं।
त्सुतोमु ने इस बात पर जोर दिया कि जापान का रणनीतिक ध्यान इस साझेदारी को मजबूत करने पर है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उसके व्यापक वित्तीय समर्थन पर आधारित है।
शिखर सम्मेलन के दौरान, औद्योगिक विकास आयुक्त और उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक गुंजन कृष्णा ने भारत, विशेषकर कर्नाटक में जापानी कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति पर प्रकाश डाला। जापानी व्यवसायों की आमद से औद्योगिक स्थान की मांग में वृद्धि हुई है।
इस वृद्धि को समायोजित करने के लिए, राज्य सरकार चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे के साथ स्थित वसंतनारसापुरा में एक नया जापानी औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बना रही है।
इस पहल का उद्देश्य नए और मौजूदा उद्यमों के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करते हुए भारत में जापान के औद्योगिक पदचिह्न को मजबूत करना है।
कृष्णा ने जापानी कंपनियों को 12-14 फरवरी, 2025 को होने वाली आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट (जीआईएम) 2025 में भाग लेने के लिए निमंत्रण भी दिया।
यह आयोजन उद्योग और सरकार के बीच विचार नेतृत्व और सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में काम करेगा, विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (एसएमई) और स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित करेगा।
भारत और जापान के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध सहयोग के एक आशाजनक भविष्य का संकेत देते हैं, जहां दोनों देशों को आपसी निवेश, औद्योगिक विकास और तकनीकी आदान-प्रदान से लाभ होगा।
(केएनएन ब्यूरो)

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