नई दिल्ली, 7 सितंबर (केएनएन) रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) या सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।
7 सितंबर, 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंजूरी दी गई। भारतीय सेना के लिए, प्रस्तावों में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) रेकी वाहन, उच्च गतिशीलता वाहन, स्व-चालित मैकेनिकल माइन लेयर्स, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम शामिल हैं।
सीबीआरएन रेकी वाहन सीबीआरएन एजेंटों द्वारा दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, पहचान करने, निगरानी करने और चिह्नित करने में सहायता करेंगे। हाई मोबिलिटी वेहिकल्स और मैकेनिकल माइन लेयर्स का उद्देश्य कठिन इलाकों में गतिशीलता, लॉजिस्टिक्स और माइनलेइंग क्षमताओं में सुधार करना है।
भारतीय नौसेना को अरुधरा राडार और समुद्री गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और उसके बाद की खरीद के लिए एओएन प्राप्त हुआ। रडार विभिन्न नौसेना वायु स्टेशनों पर मौजूदा वायु मार्ग निगरानी रडार की जगह लेंगे, जबकि समुद्री गैस टर्बाइन का उद्देश्य विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता को कम करना है।
भारतीय वायु सेना के लिए, मंजूरी में लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टरों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के प्रस्ताव शामिल हैं।
AoN को ग्राउंड-आधारित बहुउद्देश्यीय जैमर और डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (DEFSAC) सिस्टम के लिए भी प्रदान किया गया था।
ग्राउंड-आधारित बहुउद्देश्यीय जैमर प्रतिद्वंद्वी राडार के खिलाफ जैमिंग क्षमता प्रदान करेगा, जबकि DEFSAC कागज-आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट को इंटरऑपरेबल रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID)-आधारित स्मार्ट कार्ड से बदल देगा।
एओएन के तहत स्वीकृत कुल खरीद का लगभग 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से प्राप्त किया जाएगा।
(केएनएन ब्यूरो)

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