
‘भगवा की विजय हुई है’: प्रज्ञा सिंह ठाकुर की प्रतिक्रिया, मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने के बाद दिया बयान
नई दिल्ली, 31 जुलाई: 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत द्वारा सभी सात आरोपियों को बरी कर दिए जाने के बाद, पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपने तीखे और भावनात्मक बयान में इसे ‘भगवा की विजय’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी नहीं, बल्कि संपूर्ण ‘भगवा विचारधारा’ की जीत है।
“मैं शुरू से कहती आ रही हूं कि जांच के लिए जिन लोगों को बुलाया जाता है, उसके पीछे कोई ठोस आधार होना चाहिए। मुझे भी बिना ठोस सबूतों के गिरफ्तार किया गया और यातनाएं दी गईं। मेरा जीवन नष्ट हो गया,” — उन्होंने अदालत परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा।
प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आगे कहा, “मैं एक सन्यासी का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझे एक साजिश के तहत आरोपी बनाया गया। इस साजिश का मकसद सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि ‘भगवा’ और ‘हिंदुत्व’ को कलंकित करना था। आज अदालत के फैसले से ‘भगवा’ की जीत हुई है। ईश्वर ऐसे षड्यंत्रकारियों को दंड देगा।”
गुरुवार को मुंबई स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने 2008 मालेगांव धमाकों के सभी सात आरोपियों — प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधंकर धर्म द्विवेदी (शंकराचार्य), और समीर कुलकर्णी — को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
जज ए के लाहोटी ने अपने निर्णय में कहा, “अभियोजन यह सिद्ध कर पाया कि मालेगांव में विस्फोट हुआ था, लेकिन यह सिद्ध नहीं कर पाया कि बम मोटरसाइकिल में रखा गया था।” अदालत ने मेडिकल रिकॉर्ड में गड़बड़ी की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि घायलों की संख्या 101 नहीं बल्कि 95 थी, और कुछ मेडिकल प्रमाणपत्रों में हेरफेर किया गया था।
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध नहीं कर पाया कि आरोपियों के पास विस्फोटक सामग्री जमा की गई थी या उनका निर्माण किया गया था। जांच अधिकारी द्वारा घटनास्थल की स्केचिंग नहीं की गई थी, ना ही फिंगरप्रिंट या डिजिटल डंप डेटा जैसे साक्ष्य एकत्र किए गए। प्रयोगशाला परीक्षणों के लिए भेजे गए नमूनों में संदूषण पाया गया, जिससे रिपोर्ट निर्णायक नहीं हो सकी।
यह मामला 29 सितंबर 2008 का है, जब महाराष्ट्र के मालेगांव शहर के भीकू चौक इलाके में एक मोटरसाइकिल में रखे विस्फोटक उपकरण के फटने से छह लोगों की मौत हो गई थी और 95 लोग घायल हुए थे।
इस केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने 323 अभियोजन पक्ष के गवाहों और 8 बचाव पक्ष के गवाहों की गवाही सुनी। सभी आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, आर्म्स एक्ट, और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया था, जिनसे अब उन्हें बरी कर दिया गया है।
इसके साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
इस फैसले ने एक बार फिर मालेगांव ब्लास्ट केस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है, विशेषकर प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान के बाद, जिसमें उन्होंने इसे “हिंदुत्व की जीत” बताया।
प्रकाशित – 31 जुलाई, 2025 14:00 बजे
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