मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का देशभर में सफल ट्रायल, बिना इंटरनेट भी पहुंचा संदेश

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देशभर में मोबाइल सायरन अलर्ट का ट्रायल सफल, बिना इंटरनेट भी पहुंचा इमरजेंसी संदेश

 एनडीएमए और दूरसंचार विभाग की पहल, आपदा के समय त्वरित चेतावनी के लिए तैयार किया जा रहा सिस्टम


 
नई दिल्ली, 2 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): भारत सरकार ने शनिवार को देशभर में मोबाइल आधारित इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का सफल ट्रायल किया। इस दौरान करोड़ों लोगों के स्मार्टफोन पर अचानक तेज सायरन बजा और स्क्रीन पर एक टेस्ट संदेश दिखाई दिया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में लोगों तक तुरंत चेतावनी पहुंचाने की क्षमता को परखना था।

शनिवार दोपहर अचानक मोबाइल फोन पर तेज अलर्ट साउंड सुनाई देने से कई लोग चौंक गए। कुछ क्षणों के लिए भ्रम की स्थिति बनी, लेकिन संदेश पढ़ने पर स्पष्ट हो गया कि यह एक परीक्षण है। स्क्रीन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ शीर्षक के साथ एक नोटिफिकेशन फ्लैश हुआ, जिसमें बताया गया कि यह केवल एक टेस्ट संदेश है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।

यह परीक्षण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और दूरसंचार विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। संदेश हिंदी, अंग्रेजी और कई क्षेत्रीय भाषाओं में भेजा गया, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इसे आसानी से समझ सकें।

कैसे काम करता है यह सिस्टम

यह नया सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम पारंपरिक SMS से अलग है। इसमें एक साथ लाखों मोबाइल उपकरणों पर संदेश भेजा जा सकता है, बिना किसी नेटवर्क भीड़ के प्रभाव के। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रणाली इंटरनेट के बिना भी काम करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक मोबाइल टावर के जरिए सीधे प्रसारण (broadcast) के रूप में काम करती है, जिससे संदेश तुरंत सभी डिवाइस तक पहुंचता है। यही कारण है कि कुछ उपयोगकर्ताओं ने बिना सिम कार्ड वाले उपकरण पर भी यह अलर्ट प्राप्त होने का दावा किया।

सरकार का उद्देश्य

सरकार इस स्वदेशी प्रणाली के माध्यम से एक मजबूत आपदा चेतावनी नेटवर्क तैयार कर रही है। भविष्य में भूकंप, बाढ़, सुनामी, चक्रवात या गैस रिसाव जैसी घटनाओं के दौरान यह सिस्टम लोगों को समय रहते सचेत कर सकेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस प्रणाली के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका लक्ष्य जान-माल के नुकसान को कम करना है और आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।

लोगों की प्रतिक्रिया

ट्रायल के दौरान कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। कुछ उपयोगकर्ताओं ने बताया कि उन्हें यह संदेश ऐसे डिवाइस पर भी मिला जिसमें सिम कार्ड नहीं था, लेकिन वह वाई-फाई से जुड़ा हुआ था। इससे यह संकेत मिलता है कि सिस्टम विभिन्न तकनीकी माध्यमों के साथ समन्वय में काम कर सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य रूप से यह सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक मोबाइल नेटवर्क पर आधारित होती है, इसलिए बिना सिम वाले उपकरण पर संदेश मिलना एक अलग तकनीकी पहलू हो सकता है, जिसकी आगे जांच की आवश्यकता है।

पृष्ठभूमि और जरूरत

भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक क्षेत्र वाले देश में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। पिछले वर्षों में बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी घटनाओं में समय पर चेतावनी की कमी के कारण भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में एक तेज और विश्वसनीय अलर्ट सिस्टम की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

यह पहल वैश्विक मानकों के अनुरूप है, जहां कई देशों में पहले से ही मोबाइल अलर्ट सिस्टम प्रभावी रूप से काम कर रहे हैं।

आगे की योजना

सरकार इस प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से परीक्षण जारी रखेगी। आने वाले समय में अधिक सटीक लोकेशन-आधारित अलर्ट और क्षेत्र विशेष के अनुसार चेतावनी संदेश भेजने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।


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