
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (केएनएन) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने उत्पादकता, बाजार पहुंच और व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों के उपयोग में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 2,500 से अधिक पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षित किया है।
यह कार्यक्रम सरकार की “एआई फॉर सोशल गुड” दृष्टि के अनुरूप है और भारत की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था में जमीनी स्तर के कारीगरों को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रशिक्षण स्थानीय संदर्भों के अनुरूप व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से आयोजित किया गया, जिससे कारीगरों को व्यावहारिक परिदृश्यों में एआई उपकरणों को समझने और लागू करने में सक्षम बनाया गया। प्रतिभागियों को व्यवसाय और डिज़ाइन में वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करते हुए चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी और इंडस जैसे प्लेटफार्मों से परिचित कराया गया।
पाठ्यक्रम में ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग, ग्राहक जुड़ाव और उत्पाद विवरण और दृश्य सामग्री तैयार करने के लिए एआई के उपयोग सहित प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक दक्षता में सुधार करना और पारंपरिक शिल्पकारों के लिए बाजार तक पहुंच का विस्तार करना था।
इस पहल में कई राज्यों की भागीदारी देखी गई, जिसमें सबसे अधिक प्रतिनिधित्व तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और बिहार का था, जिससे लाभार्थियों की कुल संख्या 2,543 हो गई।
पारंपरिक क्षेत्रों में एआई क्षमताओं को शामिल करके, मंत्रालय का लक्ष्य डिजिटल विभाजन को पाटना, मूल्य संवर्धन बढ़ाना और भारतीय कारीगरों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना है। यह पहल नए बाजारों तक पहुंच को सक्षम करके और अनौपचारिक क्षेत्र में आजीविका को मजबूत करके टिकाऊ और समावेशी विकास का समर्थन करना चाहती है।
(केएनएन ब्यूरो)

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