
एक 85 वर्षीय व्यक्ति डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी का शिकार हो गया और एक ही दिन में घोटालेबाजों को 1.24 करोड़ रुपये खो दिए।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ठाणे के मानपाड़ा का रहने वाला है। 11 सितंबर को सुबह करीब 10 बजे पीड़ित को एक व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को विजय कुमार बताते हुए टेलीकॉम विभाग से होने का दावा किया।
फोन करने वाले ने पीड़ित को बताया कि धोखाधड़ी से अर्जित धन पीड़ित के खाते में जमा हो गया है तथा वह मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त पाया गया है तथा उसके खिलाफ मुंबई अपराध शाखा में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
कॉल करने वाले ने पीड़ित को यह भी बताया कि घाटकोपर से पीड़ित के नाम पर एक सिम कार्ड खरीदा गया है जिसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया है। इसके बाद जालसाज ने पीड़ित को एक मोबाइल नंबर दिया और उससे उस नंबर पर संपर्क करने को कहा।
पीड़ित ने निर्देशों का पालन किया और कॉल करने वाले को एक महिला ने जवाब दिया जिसने खुद को पुलिस कांस्टेबल बताया। इसके बाद उक्त महिला ने पीड़ित के साथ अपनी पहचान बताई और फिर पीड़ित को वीडियो कॉल किया। इसके बाद उसने पीड़ित से उसके आधार कार्ड का विवरण मांगा।
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को हेमराज बताते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच से होने का दावा करते हुए व्हाट्सएप कॉल पर पीड़ित से बात की। इसके बाद कॉल करने वाले ने पीड़ित को बताया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग में पकड़ा गया है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
इसके बाद घोटालेबाजों ने पीड़ित से कहा कि अगर वह इस मामले से बाहर निकलना चाहता है और क्लीन चिट पाना चाहता है तो उसे उनके द्वारा बताए गए बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने होंगे। जांच पूरी होने तक उक्त पैसे आरबीआई के पास सुरक्षित रहेंगे और जांच पूरी होने के बाद अगर पीड़ित का पैसा साफ पाया जाता है तो उसे उसके बैंक खाते में वापस कर दिया जाएगा।
इसके बाद पीड़ित ने तीन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में 1.24 करोड़ रुपए ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। 13 सितंबर को पीड़ित ने ठगों को फोन करके पैसे के बारे में पूछा, जिसके बाद ठगों ने कहा कि रात 8 बजे तक पैसे उनके खाते में वापस आ जाएंगे।
हालांकि, जब पीड़ित को उसके पैसे वापस नहीं मिले, तो उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया और रविवार को इस मामले में अपराध दर्ज करवाया। पुलिस ने इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी (पहचान की चोरी), 66डी (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है।

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