
निति आयोग ने मेयर के सीधे चुनाव और अधिक अधिकार देने की सिफारिश की, जिससे शहरों की सेवाओं में सुधार संभव।
निति आयोग की सिफारिश: सीधे चुने जाएं मेयर, शहरों को मिलें अधिक अधिकार
मेयर-इन-काउंसिल सिस्टम लागू करने का सुझाव, 46 बड़े शहरों की व्यवस्था में बदलाव की संभावना
नई दिल्ली, 4 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): देश में शहरी शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निति आयोग ने केंद्र सरकार को अहम सिफारिशें दी हैं। आयोग ने कहा है कि सभी राज्यों में मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा पांच साल के लिए कराया जाना चाहिए। साथ ही मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली लागू कर नगर निगमों को अधिक अधिकार दिए जाएं, ताकि शहरों का विकास तेज़ी से हो सके और नागरिक सेवाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध कराई जा सकें।
निति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बड़े शहरों में शहरी प्रशासन अभी भी कई स्तरों पर बंटा हुआ है, जिससे निर्णय लेने में देरी होती है और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता। आयोग ने सुझाव दिया है कि मेयर को अधिक कार्यकारी अधिकार दिए जाएं और नगर निगम को शहरी विकास का मुख्य केंद्र बनाया जाए।
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि शहरों की योजना, सड़क और पुल निर्माण जैसे प्रमुख कार्य नगर निगमों के अधीन होने चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकेगा। इसके अलावा, नगर सरकारों को राज्य सरकारों की सीधी दखलंदाजी से बचाने की भी सिफारिश की गई है।
निति आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि बिना राज्य विधानसभा की निगरानी के किसी भी नगर निगम को भंग करने पर रोक लगाई जाए। इससे स्थानीय निकायों की स्थिरता बनी रहेगी और शासन व्यवस्था मजबूत होगी।
मेयर–इन–काउंसिल सिस्टम क्या है
रिपोर्ट में मेयर-इन-काउंसिल सिस्टम को लागू करने पर जोर दिया गया है। इस प्रणाली के तहत मेयर के साथ एक परिषद होती है, जिसमें चुने हुए पार्षद शामिल होते हैं। हर सदस्य को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी दी जाती है, जैसे जल आपूर्ति, सफाई, परिवहन और शहरी योजना।
इस व्यवस्था में मेयर को विभागों के प्रमुखों की नियुक्ति का अधिकार भी दिया जाएगा। इससे प्रशासनिक फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और जवाबदेही तय होगी।
46 बड़े शहरों पर असर
निति आयोग का मानना है कि अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 46 बड़े शहरों की तस्वीर बदल सकती है। इन शहरों में देश की लगभग 36 प्रतिशत शहरी आबादी रहती है।
इन शहरों का कुल क्षेत्रफल करीब 10,926 वर्ग किलोमीटर है। ऐसे में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था से पानी की आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, सफाई, सार्वजनिक परिवहन और आपात सेवाओं में सुधार संभव है।
राज्यों में मौजूदा स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में नगर निगमों के पास पहले से ही कई अहम अधिकार हैं। इन राज्यों में पानी की आपूर्ति, सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन और बस सेवाएं नगर निगम के नियंत्रण में हैं।
हालांकि, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में अभी भी बस सेवाएं और शहरी योजना राज्य सरकारों के अधीन हैं। इससे स्थानीय निकायों की भूमिका सीमित हो जाती है।
चुनौतियां और सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी शासन में सबसे बड़ी समस्या अधिकारों का केंद्रीकरण और जिम्मेदारी का अस्पष्ट होना है। कई बार नगर निगम के पास जिम्मेदारी तो होती है, लेकिन अधिकार नहीं होते, जिससे काम प्रभावित होता है।
निति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य सरकारों को नगर पालिका कानूनों में संशोधन करना चाहिए, ताकि मेयर-इन-काउंसिल को नगर निगम का मुख्य कार्यकारी निकाय बनाया जा सके।
भविष्य की दिशा
अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो शहरी प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है। इससे नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और शहरों का विकास तेज़ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत स्थानीय शासन ही स्मार्ट और टिकाऊ शहरों की नींव रख सकता है। आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकारों का इस दिशा में क्या रुख रहता है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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