नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (केएनएन) नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने कहा कि सरकार की अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना से अगले दशक में निजी क्षेत्र के निवेश में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये आने और नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
करंदीकर ने कहा कि 1 लाख करोड़ रुपये की योजना से कम से कम 10 विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय कंपनियों को विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आरडीआई योजना
पिछले साल शुरू की गई यह योजना अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से गहन तकनीकी नवाचार का समर्थन करती है। सरकार ने FY26 में कार्यक्रम के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए।
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसके फोकस क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत सामग्री शामिल हैं।
डीप-टेक इनोवेशन के लिए फंडिंग सहायता
प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 4 और उससे ऊपर की परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक, शून्य-ब्याज ऋण और इक्विटी समर्थन के माध्यम से धन उपलब्ध है, जो परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक कवर करता है।
करंदीकर ने कहा कि यह योजना महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है।
निजी क्षेत्र का अनुसंधान एवं विकास निवेश धीरे-धीरे बढ़ रहा है
उन्होंने कहा कि सहायक सरकारी नीतियों के बीच अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) में निजी क्षेत्र का निवेश धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
अनुसंधान एवं विकास पर भारत का सकल व्यय वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद का 0.8 प्रतिशत है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से निजी क्षेत्र का योगदान लगभग 30 प्रतिशत है और सरकार का शेष 70 प्रतिशत है।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 139 अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत की रैंकिंग 2015 में 81वें से सुधरकर 2026 में 38वें स्थान पर पहुंच गई।
(केएनएन ब्यूरो)

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