
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के ठेका कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर मोर्चा खोल दिया है।
यूनियन के राज्य प्रधान रेशम सिंह गिल ने चंडीगढ़ में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि परिवहन विभाग के कर्मचारी पूरी निष्ठा से जनता को सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
मज़दूर संघ का दावा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों के बावजूद कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है। पिछले तीन सालों में सरकार नई बसें खरीदने में विफल रही है, जिससे निजी परिवहन कंपनियों का दबदबा बढ़ गया है।
किलोमीटर योजना के क्रियान्वयन में निजी बसों की तैनाती के कारण सरकारी खजाने से धन का दुरुपयोग हुआ है, जिससे यूनियन काफी नाराज है।
राज्य सचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि पंजाब की आबादी के हिसाब से कम से कम 10 हजार सरकारी बसें होनी चाहिए, लेकिन इस समय बसों की भारी कमी है, जिससे आए दिन हादसे होते रहते हैं, जिसका खामियाजा ड्राइवरों और कंडक्टरों को भुगतना पड़ता है।
आक्रोशित यूनियन प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा था कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो 15 अक्टूबर को पूरे पंजाब में बस स्टैंड बंद कर दिए जाएंगे और 22 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा, “अगर इसके बावजूद समाधान नहीं निकला तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे।”
यूनियन का आरोप है कि परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है और कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो सरकार को आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा

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